अपनी ही सरकार पर क्यों भड़का ABVP, मंत्री राजभर के खिलाफ खोला मोर्चा

उत्तर प्रदेश में इन दिनों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलकर सड़क पर उतर आई है। मामला बाराबंकी के श्रीराम स्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ, जहां एलएलबी कोर्स की मान्यता और छात्रों के सस्पेंशन को लेकर विवाद खड़ा हुआ। छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस दौरान एबीवीपी के करीब 25 कार्यकर्ता घायल हो गए और कई पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए। आरोप यह भी लगे कि प्रशासन के इशारे पर बाहरी गुंडों ने छात्रों पर हमला किया।

लाठीचार्ज के बाद छात्रों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने डीएम आवास के बाहर जमकर नारेबाजी की। इसी बीच कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बयान आग में घी साबित हुआ। राजभर ने कहा था कि एबीवीपी के गुंडों पर पुलिस ने सही लाठी बरसाई। इस बयान से छात्रों में आक्रोश और बढ़ गया और मंगलवार देर रात लखनऊ में उनके आवास के बाहर उग्र प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पुतला फूंका, गेट पर चढ़कर नारे लगाए और पुलिस से भी भिड़ंत हुई।

मामला तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया और बाराबंकी के सीओ सिटी हर्षित चौहान को हटा दिया। साथ ही, घटना की जांच अयोध्या रेंज के आईजी और मंडलायुक्त को सौंपी गई।

छात्रों की मांग है कि दोषी पुलिसकर्मियों और यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कार्रवाई की जाए, निष्कासित छात्रों को बहाल किया जाए और लॉ डिग्री की मान्यता को लेकर स्पष्टता लाई जाए। एबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जब तक घायल छात्रों को न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।

वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि उनके पास बार काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता 2023 तक थी और 2027 तक नवीनीकरण के लिए आवेदन कर दिया गया है। कुलपति का आरोप है कि बाहरी लोगों ने गेट बंद कर छात्रों में घबराहट फैलाई। हालांकि छात्रों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी आवाज को दबाने के लिए यह सब किया जा रहा है।

इस विवाद ने प्रदेश की सियासत को भी गर्मा दिया है और यह साफ है कि एबीवीपी और अपनी ही सरकार के बीच यह टकराव अभी थमता नजर नहीं आ रहा।

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