दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों की रेस में कौन आगे? लाल किले और कुतुब मीनार की लोकप्रियता पर बड़ा आंकलन

देश की राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके के बाद सुरक्षा कारणों से इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था, लेकिन अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इसे फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया है. विस्फोट के बाद से शहर में सुरक्षा प्रबंधों को लेकर बहस तेज़ रही, लेकिन अब भी दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं. पर्यटन मंत्रालय की ताज़ा समीक्षा बताती है कि लाल किला वित्त वर्ष 2025 में घरेलू पर्यटकों के आकर्षण के लिहाज़ से देश के संरक्षित स्मारकों में चौथे स्थान पर रहा. इस दौरान स्मारक ने 28.8 लाख यात्रियों की मेज़बानी की और राष्ट्रीय पर्यटन हिस्सेदारी में 5.32 प्रतिशत का योगदान दिया.

लाल किले की लोकप्रियता केवल देश तक सीमित नहीं रही. वित्त वर्ष 2025 में यहां लगभग 3 प्रतिशत विदेशी पर्यटक भी पहुंचे, जो इसे दिल्ली के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आकर्षणों में बनाए रखता है. हालांकि दिल्ली में पर्यटक प्रवाह के मामले में कुतुब मीनार ने लाल किले से अधिक बढ़त बनाई. रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अवधि में कुतुब मीनार ने 36.37 प्रतिशत घरेलू और 16.7 प्रतिशत विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया. इस लिहाज़ से दिल्ली के अंदर यह लाल किले के मुकाबले ज़्यादा भीड़ खींचने वाला दूसरा सबसे बड़ा स्मारक माना गया.

शहर स्तर पर भी दिल्ली का प्रदर्शन मिश्रित रहा. वित्त वर्ष 2025 में विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में दिल्ली 9.55 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ राष्ट्रीय स्तर पर छठे स्थान पर रही, जबकि महाराष्ट्र इस श्रेणी में शीर्ष पर बना रहा. वहीं, घरेलू पर्यटन में दिल्ली की हिस्सेदारी 1.57 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसने इसे देश में 14वें स्थान पर ला खड़ा किया.

कुतुब मीनार निर्माण के लिहाज़ से भी देश की शान है. 73 मीटर ऊंची यह ईंटों की मीनार 1193 में कुतुबुद्दीन ऐबक के शासन में बननी शुरू हुई थी, जिसे बाद में इल्तुतमिश और फिरोज़ शाह तुगलक ने पूरा कराया. यह मीनार पांच मंज़िला संरचना है, जिसमें बालकनियां और विविध स्थापत्य शैलियों का मेल देखने मिलता है. वहीं लाल किला मुगल सम्राट शाहजहां के शासन में 1638 में बनना शुरू हुआ था. इसके नक़्शे का श्रेय उस्ताद अहमद लाहौरी को जाता है, जिन्होंने ताजमहल की भी परिकल्पना की थी. लाल किला मुगलकालीन वास्तुकला का शानदार उदाहरण है, जो फ़ारसी और भारतीय डिज़ाइन परंपराओं का संगम प्रस्तुत करता है.

दोनों स्मारक दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान की रीढ़ बने हुए हैं. एक तरफ कुतुब मीनार अपनी ऊंचाई, वास्तु विविधता और रिकॉर्ड पर्यटन संख्या से आगे दिखती है, वहीं दूसरी ओर लाल किला देशभक्ति, सांस्कृतिक विरासत और भारी घरेलू पर्यटन प्रवाह के कारण दिल्ली के सबसे सम्मानित स्मारकों में अपनी मज़बूत जगह बनाए हुए है. खबर तो यही है कि दिल्ली के ये प्रतीक आगे भी पर्यटकों की यात्राओं का केंद्र बने रहेंगे, लेकिन चुनौती यह रहेगी कि सुरक्षा और संरक्षण के बीच इनकी विरासत कितनी सुरक्षित और जीवंत रह पाती है. (शब्द: ~350)

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