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उपराष्ट्रपति चुनाव में 7 वोट कम, जम्मू-कश्मीर से दूसरी बार नहीं होगा मतदान

उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितंबर को चुनाव होने जा रहा है। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद यह पद रिक्त हुआ है। धनखड़ ने 2022 में उपराष्ट्रपति का कार्यभार संभाला था और उनका कार्यकाल अगस्त 2027 तक था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने पद छोड़ दिया। इस बार चुनाव में खास बात यह है कि कुल सात वोट कम पड़ेंगे। साथ ही लगातार दूसरी बार ऐसा होगा जब जम्मू-कश्मीर से कोई भी सांसद मतदान में हिस्सा नहीं लेगा।

लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल 781 सदस्य हैं, लेकिन इस बार सात सीटें रिक्त होने के कारण चुनाव में 774 वोट ही डाले जाएंगे। इनमें लोकसभा की बशीरघाट सीट खाली है और राज्यसभा की छह सीटें रिक्त हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर की चार सीटें, पंजाब की एक और झारखंड की एक सीट शामिल है। इसलिए चुनाव में कुल 7 वोट कम होंगे। राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद मतदान करते हैं।

जम्मू-कश्मीर से आखिरी बार फरवरी 2021 में गुलाम नबी आजाद और नाजिर अहमद का कार्यकाल समाप्त हुआ था। उसके बाद से यहां से राज्यसभा में कोई प्रतिनिधि नहीं है। विधानसभा चुनाव के बावजूद अब तक राज्यसभा का चुनाव नहीं हो सका। यही कारण है कि 2022 के राष्ट्रपति चुनाव की तरह इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में भी जम्मू-कश्मीर की ओर से कोई सांसद मतदान नहीं करेगा।

संख्या बल के लिहाज से एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। एनडीए के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 129 सांसद हैं, यानी कुल 422 वोट। चुनाव जीतने के लिए 391 वोटों की आवश्यकता है। ऐसे में सत्तापक्ष को स्पष्ट बढ़त हासिल है।

केंद्रीय विधि मंत्रालय ने चुनाव आयोग के उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया जिसमें जम्मू-कश्मीर की राज्यसभा सीटों का कार्यकाल अलग-अलग करने की मांग की गई थी। कानून मंत्रालय का कहना है कि इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है। अनुच्छेद 83 के अनुसार राज्यसभा स्थायी सदन है और हर दो साल में इसके एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं। लेकिन जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक राष्ट्रपति शासन रहने और विधानसभा चुनाव देर से होने के कारण सभी सीटें एक साथ खाली हो गईं।

इस स्थिति के चलते लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर के बड़े चुनाव में जम्मू-कश्मीर की ओर से कोई भी सांसद भाग नहीं ले पाएगा।

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