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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दी चेतावनी: भारत को कमजोर करने की हो रही कोशिशें, देश को सतर्क रहना होगा

नई दिल्ली:उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को नई दिल्ली में राम माधव की किताब ‘New World: 21st Century Global Order in India’ का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने देश के सामने मौजूद चुनौतियों, भारत की रणनीतिक सोच, और सावरकर जैसे विचारकों की प्रासंगिकता पर विस्तार से बात की। साथ ही उन्होंने देशवासियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी।

भारत को कमजोर करने वाली ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत

उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश के भीतर और बाहर ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो भारत को कमजोर करना चाहती हैं। ये ताकतें भाषा जैसे मुद्दों पर लोगों को बांटकर भ्रम फैलाने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी ताकत है, जिसे हमें बचाए रखना चाहिए।

सावरकर को बताया दूरदर्शी विचारक

धनखड़ ने किताब पढ़ते हुए विनायक दामोदर सावरकर की छवि देखने की बात कही। उन्होंने सावरकर को “कट्टर यथार्थवादी” बताते हुए कहा कि उन्होंने दशकों पहले ही यह भविष्यवाणी की थी कि देश सिर्फ अपने हितों को देखकर काम करेंगे, न कि आदर्शों या अंतरराष्ट्रीय एकता के नाम पर।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी विचारक जॉर्ज टन्हैम ने कहा था कि भारत में रणनीतिक सोच की कमी है, लेकिन राम माधव की यह किताब उस सोच को गलत साबित करती है। महाभारत में धर्मयुद्ध की अवधारणा, अशोक के धम्म नीति और चाणक्य का मंडल सिद्धांत भारत की गहरी रणनीतिक सोच का प्रमाण हैं।

‘भारत का जन्म 1947 में नहीं हुआ’

धनखड़ ने जोर देकर कहा कि भारत की सभ्यता हजारों साल पुरानी है, और 15 अगस्त 1947 को हमने सिर्फ औपनिवेशिक सत्ता से मुक्ति पाई थी। भारत को बनाना नहीं है, उसे पहचानना है। उन्होंने कहा, “हमारा राष्ट्रवाद वही है – सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।”

उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से शांतिप्रिय रहा है और कभी भी विस्तारवादी नीतियों में शामिल नहीं रहा। आज के समय में जब दुनिया में तनाव बढ़ रहा है, भारत सभी नागरिकों के कल्याण की दिशा में आगे बढ़ते हुए दुनिया के लिए एक आदर्श बन रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आगे

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी फैसलों के चलते भारत आज वैश्विक मंचों पर मजबूत आवाज बनकर उभरा है। जी-20 सम्मेलन में अफ्रीकी संघ को बराबरी की सदस्यता देना एक ऐतिहासिक कदम था।

धनखड़ ने देश के राजनीतिक दलों से अपील की कि वे आपसी संवाद बढ़ाएं और नीतियों पर एक साथ काम करें। उन्होंने कहा, “हमारे असली दुश्मन देश के बाहर हैं, और जो भीतर हैं वे उन्हीं से जुड़े हुए हैं।” साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि देश को मजबूत बनाने के लिए नीतियों में विविधता और संवाद की ज़रूरत है।

उपराष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक मंच पर तेजी से उभर रहा है और देश के भीतर भी राजनीति और विचारधाराओं को लेकर बहसें तेज हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को सतर्क रहकर आगे बढ़ना है, क्योंकि चुनौतियां बहुत हैं — लेकिन देश की एकता और दूरदर्शी सोच से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।

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