SIR में जन्मतिथि के प्रमाण को लेकर बड़ा प्रस्ताव, बंगाल में सेकेंडरी एडमिट कार्ड को मिल सकती है मान्यता

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अब आपत्तियों की सुनवाई चल रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सामने आ रहे हैं, जिन्होंने सेकेंडरी परीक्षा पास नहीं की है, लेकिन उनके पास माध्यमिक परीक्षा का एडमिट कार्ड मौजूद है, जिसमें जन्मतिथि दर्ज है। इसी को देखते हुए बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सेकेंडरी परीक्षा के एडमिट कार्ड को जन्मतिथि के वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने की सिफारिश चुनाव आयोग से की है।
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यदि आयोग इस सिफारिश को मंजूरी देता है तो यह नियम पूरे पश्चिम बंगाल में लागू होगा। ऐसा होने पर बंगाल देश का पहला राज्य बन सकता है, जहां SIR प्रक्रिया में माध्यमिक एडमिट कार्ड को वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। इससे पहले बिहार में बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा जारी मैट्रिक परीक्षा के एडमिट कार्ड को मान्य दस्तावेज नहीं माना गया था।
वर्तमान में चुनाव आयोग किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय से जारी मैट्रिकुलेशन या अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को अधिसूचित दस्तावेजों की सूची में शामिल करता है। बंगाल में प्रस्तावित बदलाव से उन मतदाताओं को राहत मिल सकती है, जिनके पास जन्म प्रमाण के अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
SIR प्रक्रिया के तहत सुनवाई 27 दिसंबर से जारी है। इस दौरान बुजुर्गों, गंभीर रूप से बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को सुनवाई केंद्र तक बुलाए जाने को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं, गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार और दिव्यांग लोगों की सुनवाई उनके घर पर ही की जाएगी।
चुनाव आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया और पात्र लोगों को सुनवाई केंद्र आने के लिए मजबूर किया गया, तो संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर और उनके सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों को लेकर भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। आयोग ने कहा है कि केवल दस्तावेजों की कमी के आधार पर ऐसे मजदूरों के नाम SIR सूची से न हटाए जाएं। चाय बागान श्रमिकों से जुड़ी रोजगार और पीएफ जैसी जानकारियों के आधार पर सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।





