परिवारवाद विवाद के बीच उपेंद्र कुशवाहा ने बेटे दीपक को मंत्री बनाए जाने का दिया तर्क

नीतीश कुमार की कैबिनेट में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिना चुनाव लड़े मंत्री बनाए जाने के बाद परिवारवाद को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। इस विवाद पर स्वयं उपेंद्र कुशवाहा सामने आए और सोशल मीडिया पर लंबा बयान जारी करते हुए कहा कि यह फैसला उनके लिए “जहर पीने” जैसा था, लेकिन पार्टी के अस्तित्व को बचाने के लिए यह कदम जरूरी था।
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अगर यह निर्णय नहीं लिया जाता, तो पार्टी दोबारा शून्य पर पहुंच सकती थी। उन्होंने लिखा कि इतिहास से सीखते हुए उन्होंने वही रास्ता चुना जो संगठन के भविष्य के लिए आवश्यक था। उन्होंने समुद्र मंथन का उदाहरण देते हुए कहा कि “अमृत भी निकलता है और जहर भी… और कुछ लोगों को जहर पीना ही पड़ता है।”
बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने पर उठे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि दीपक योग्य हैं, कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग कर चुके हैं और मेहनती हैं। उन्होंने लिखा कि दीपक किसी भी तरह से “फेल विद्यार्थी” नहीं हैं और लोगों को समय देना चाहिए ताकि वह अपनी क्षमता साबित कर सकें। कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की पात्रता उसकी जाति या परिवार से नहीं, बल्कि उसकी योग्यता से तय होती है।
अपने बयान में उन्होंने आलोचकों को भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ आलोचना का स्वागत है, लेकिन पूर्वाग्रह से भरी आलोचनाएं आलोचक की नीयत दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले भी कई कठिन निर्णय झेले हैं, जिनमें विलय का निर्णय भी शामिल था, जिसके बाद पार्टी को दोबारा खड़ा करना पड़ा। उन्होंने इस बार कोई जोखिम न लेने का फैसला किया।
कुशवाहा ने पार्टी और समर्थकों से कहा कि वर्तमान फैसला भले ही विवादों में हो, लेकिन इससे संगठन मजबूत होगा और भविष्य के लिए स्थिरता मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दीपक अपनी जिम्मेदारी पर खरे उतरेंगे और सभी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे।





