दिल्ली में उद्धव ठाकरे-सुनीता केजरीवाल की मुलाकात, सीएम केजरीवाल के माता-पिता भी रहे मौजूद

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे तीन दिवसीय दिल्ली दौरे पर हैं. आज उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की धर्मपत्नी सुनीता केजरीवाल से मुलाकात की. इस दौरान सीएम केजरीवाल के माता पिता भी मौजूद रहे. इस मुलाकात में सांसद संजय सिंह और राघव चड्ढा भी मौजूद रहे. अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद यह पहला अवसर है जब उद्धव ठाकरे खास तौर से सुनीता केजरीवाल से मुलाकात करने पहुंचे. लोकसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे पहली बार दिल्ली आए हैं और बीते दो दिनों में उन्होंने कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात की है. उद्धव ठाकरे के दिल्ली दौरे को कई मायनों में देखा जा रहा है.

केजरीवाल के साथ उद्धव ठाकरे के रहे हैं मधुर संबंध

उद्धव ठाकरे और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच शुरू से ही बेहतर संबंध रहे हैं. दिल्ली से संबंधित कई मुद्दों पर जब भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन और सलाह की जरूरत महसूस हुई, अरविंद केजरीवाल मुंबई जाकर उद्धव ठाकरे से जरूर मिलते थे. यहां तक कि लोकसभा चुनाव के लिए बने इंडिया गठबंधन में शामिल उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल के बीच सियासी समीकरण से कार्यकर्ताओं में अलग संदेश देने की कोशिश की जाती रही.

महाराष्ट्र में भी विधानसभा चुनाव लड़ेगी AAP

इस साल के अंत में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में हरियाणा के साथ-साथ आम आदमी पार्टी महाराष्ट्र में भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है. महाराष्ट्र की राज्य इकाई में आम आदमी पार्टी के अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान हो चुका है. लेकिन आज उद्धव ठाकरे और सुनीता केजरीवाल के बीच होने वाली मुलाकात में संभावना है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर भी उनके बीच कोई नई चर्चा हो.

मंगलवार को दिल्ली पहुंचे उद्धव ठाकरे

बता दें कि उद्धव ठाकरे तीन दिन के दौरे पर मंगलवार को दिल्ली पहुंचे थे. मिली जानकारी के मुताबिक आज देर शाम वे महाराष्ट्र वापस लौट जाएंगे. इस बीच उन्होंने कांग्रेस, एनसीपी, टीएमसी के नेताओं से भी मुलाकात की है. दिल्ली में मौजूद उद्धव ठाकरे ने वर्तमान में चल रहे बांग्लादेश के घटनाक्रम को लेकर भी प्रतिक्रिया दी और कहा था कि जनता सर्वोच्च है और सरकारों को उनके धैर्य की परीक्षा नहीं लेना चाहिए.

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