उत्तराखंड में UCC संशोधन अध्यादेश लागू, लिव-इन और धोखाधड़ी मामलों में बढ़ी सख्ती

उत्तराखंड सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड में सुधार के लिए संशोधन अध्यादेश लागू कर दिया है। इस अध्यादेश के तहत शादी और लिव-इन रिलेशनशिप में धोखाधड़ी, दबाव और जबरदस्ती जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इन संशोधनों का उद्देश्य यूसीसी के प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और व्यावहारिक बनाना है। साथ ही नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना भी इसका मुख्य लक्ष्य है। अब शादी के समय पहचान छिपाने को विवाह रद्द करने का आधार माना जाएगा।
अध्यादेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि शादी या लिव-इन रिलेशनशिप में जबरदस्ती, धोखाधड़ी या अवैध गतिविधियों में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी सजा दी जाएगी। शादीशुदा होते हुए लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए सात साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
लिव-इन रिलेशनशिप समाप्त होने पर रजिस्ट्रार द्वारा टर्मिनेशन सर्टिफिकेट जारी करने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही “विधवा” शब्द को “जीवनसाथी” से बदलने का प्रावधान भी जोड़ा गया है। रजिस्ट्रार जनरल को शादी, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और विरासत से जुड़े पंजीकरण रद्द करने का अधिकार दिया गया है।
अध्यादेश में यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि सब-रजिस्ट्रार तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं करता है, तो मामला स्वतः उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाएगा। जुर्माने की वसूली भूमि राजस्व के रूप में की जा सकेगी और इसके खिलाफ अपील का अधिकार भी दिया गया है।
उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य है, जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया गया था। इसे 27 जनवरी 2025 से लागू किया गया था। इसके लागू होने की पहली वर्षगांठ को राज्य में ‘यूसीसी दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि यूसीसी से राज्य में समान कानून व्यवस्था, पारदर्शिता और सामाजिक समानता को बढ़ावा मिला है। संशोधित अध्यादेश के जरिए अब इसे और अधिक प्रभावी और न्यायसंगत बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।





