परंपरा पर प्रहार या नई नीति? शहीद दिवस पर छत्तीसगढ़ में खुली रहीं शराब दुकानें, ब्लैकिंग करने वालों को झटका

रायपुर।छत्तीसगढ़ में 30 जनवरी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि यानी शहीद दिवस पर इस बार एक अलग ही नजारा देखने को मिला। दशकों से चली आ रही परंपरा के उलट, प्रदेशभर में शराब की दुकानें सामान्य दिनों की तरह खुली रहीं। आमतौर पर इस दिन को शुष्क दिवस (ड्राई डे) के रूप में मनाया जाता रहा है, जब शराब दुकानों, बार और मांस-मटन की बिक्री पर पूरी तरह रोक रहती थी।
इस बार प्रशासनिक फैसले ने मदिरा प्रेमियों को चौंका दिया। दरअसल, दुकानें बंद रहने की आशंका में कई लोगों ने 29 जनवरी को ही महंगे दामों पर शराब खरीदकर स्टॉक जमा कर लिया था। लेकिन 30 जनवरी को दुकानें खुली रहने से उनकी यह “ब्लैकिंग” पूरी तरह फेल हो गई और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
शराब दुकानों के खुले रहने के फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। लोग इसे हालिया प्रशासनिक और नीतिगत बदलावों से जोड़कर देख रहे हैं। एक ओर मनरेगा के नाम बदलने का विवाद और दूसरी ओर यूजीसी के नए नियमों को लेकर विरोध पहले से ही माहौल गर्माए हुए है। ऐसे में शहीद दिवस पर ड्राई डे न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
जहां शराब दुकानों पर सामान्य दिनों की तरह भीड़ नजर आई, वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं और गांधीवादी संगठनों ने इसे गांधी जी के सिद्धांतों और परंपराओं के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि जिस दिन सत्य और अहिंसा का संदेश दिया जाता है, उसी दिन इस तरह का फैसला अनुचित है।
सरकार की ओर से इस बदलाव पर कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। माना जा रहा है कि इस फैसले को लेकर आने वाले दिनों में विरोध और राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।





