छठ महापर्व का तीसरा दिन: आज डूबते सूर्य को दिया जाएगा संध्या अर्घ्य, जानें नियम और महत्व

छठ महापर्व का आज तीसरा दिन है, जिसे संध्या अर्घ्य का दिन कहा जाता है। आज के दिन व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा करती हैं। यह व्रत संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है। छठ पर्व का यह सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है, जहां श्रद्धा, संयम और आस्था का संगम देखने को मिलता है।

आज संध्या के समय अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का अर्थ है जीवन में कृतज्ञता और संतुलन बनाए रखना। संध्या अर्घ्य सूर्य देव की पत्नी प्रत्यूषा को समर्पित होता है, जो सूर्य की अंतिम किरण मानी जाती हैं। इससे जीवन के हर उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने और प्रकृति का आभार व्यक्त करने की भावना जुड़ी होती है।

आज संध्या अर्घ्य का समय शाम 4:50 बजे से 5:41 बजे तक रहेगा। व्रती इस दौरान सूर्य को जल अर्पित करेंगे और सूर्य मंत्र ‘ॐ सूर्याय नमः’ का जाप करेंगे। अर्घ्य देते समय तांबे के लोटे या बर्तन का उपयोग करना शुभ माना गया है। सूर्य की ओर मुख रखकर जल अर्पण करते समय उसमें लाल चंदन, सिंदूर और लाल फूल डालने की परंपरा है। जल अर्पित करते समय ध्यान रखना चाहिए कि जल पैरों में न गिरे, बल्कि धरती या गमले में विसर्जित किया जाए।

छठ व्रत की शुरुआत खरना के दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद निर्जला उपवास से होती है। व्रती पूरे दिन बिना अन्न-जल ग्रहण किए पूजा-पाठ करते हैं। संध्या अर्घ्य के बाद अगले दिन प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को उषा अर्घ्य दिया जाता है, जिसके बाद व्रत का पारण होता है।

आस्था से भरा यह पर्व आत्मशुद्धि, संयम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है। सूर्य को अर्घ्य देकर लोग न केवल अपने परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं, बल्कि अपने जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का स्वागत भी करते हैं।

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