सोनम वांगचुक की हिरासत पर सरकार की दलील, सुप्रीम कोर्ट में NSA को ठहराया सही

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। सरकार ने कहा कि वांगचुक के बयान और शब्दों का चयन अलगाववादी सोच को दर्शाता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वांगचुक ने सरकार को ‘वे’ कहकर संबोधित किया, जिससे ‘हम’ और ‘वे’ जैसी भावना पैदा हुई। सरकार के अनुसार, यही सोच देश की एकता के लिए खतरा बन सकती है और इसी आधार पर उनके खिलाफ NSA लगाया गया।
सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक लद्दाख में नेपाल और बांग्लादेश जैसी अशांति और आंदोलन की स्थिति पैदा करना चाहते थे। उन्होंने युवाओं, खासकर Gen Z को भड़काने और खून-खराबा तथा गृह युद्ध के लिए उकसाने का प्रयास किया।
मेहता ने कहा कि वांगचुक अपने भाषणों में अरब स्प्रिंग और आत्मदाह जैसे विषयों का जिक्र कर युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहे थे। उनका उद्देश्य आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना और भावनाओं को भड़काना था।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि वांगचुक महात्मा गांधी के नाम का उपयोग केवल दिखावे के लिए करते थे, जबकि उनके भाषणों की सामग्री भड़काऊ होती थी। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हिरासत का आदेश दिया।
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने उनकी हिरासत के खिलाफ याचिका दायर की है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। याचिका में कहा गया है कि सरकार की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ना गलत है।
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि लद्दाख सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां सेना की आपूर्ति व्यवस्था निर्भर करती है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की अस्थिरता देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई कर रहा है और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।





