भारत में बुजुर्गों की संख्या बढ़ी, बच्चों की हिस्सेदारी 50 साल में 17 प्रतिशत घटी; केरल में सबसे ज्यादा बुजुर्ग

दिल्ली। भारत की जनसंख्या का ढांचा तेजी से बदल रहा है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट 2023 के मुताबिक, देश में 0-14 साल के बच्चों की आबादी लगातार घट रही है, जबकि बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है। 1971 में बच्चों की हिस्सेदारी 41.2% थी, जो 2023 में घटकर 24.2% रह गई। यानी 50 साल में इसमें लगभग 17% की कमी आई है।
दूसरी ओर, कामकाजी उम्र (15-59 वर्ष) के लोगों की आबादी में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 1971-81 में यह 53.4% थी, जो 2023 में बढ़कर 66.1% हो गई। दिल्ली में इस वर्ग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 70.8%, जबकि बिहार में सबसे कम 60.1% है। शहरी इलाकों में यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक है।
रिपोर्ट बताती है कि देश में 60 साल से अधिक आयु वर्ग की हिस्सेदारी 2023 में 9.7% हो गई है। इनमें केरल 15.1% के साथ सबसे आगे है, उसके बाद तमिलनाडु (14%) और हिमाचल प्रदेश (13.2%) का स्थान है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में पेंशन और सामाजिक सुरक्षा पर दबाव और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों की संख्या घटना भविष्य में कार्यबल को छोटा करेगा और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है। वहीं, कम बच्चों का मतलब प्रति बच्चे पर बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश की संभावना भी बढ़ेगी।
इस रिपोर्ट में देश की कुल प्रजनन दर भी घटकर 1.9 दर्ज की गई है, जो 1971 में 5.2 थी। वहीं, शिशु मृत्यु दर 2013 के 40 से घटकर 2023 में 25 रह गई है, यानी 10 साल में इसमें 37.5% की कमी आई है। यह सुधार भारत की स्वास्थ्य सेवाओं में प्रगति को दर्शाता है।





