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वो 10 तर्क, जिनसे कुलदीप सेंगर की बेटियां पिता को बता रही हैं निर्दोष

उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए जा चुके पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उनकी सजा को निलंबित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सेंगर की दोनों बेटियां ऐश्वर्या और इशिता एक बार फिर अपने पिता के समर्थन में खुलकर सामने आई हैं और सोशल मीडिया के जरिए उन्हें निर्दोष साबित करने की कोशिश कर रही हैं।

सेंगर की बड़ी बेटी ऐश्वर्या का कहना है कि घटना के समय उनके पिता घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे। उनके अनुसार, सीबीआई द्वारा निकाले गए कॉल डिटेल रिकॉर्ड बताते हैं कि उस समय कुलदीप सेंगर घटनास्थल से करीब 17 किलोमीटर दूर थे। साथ ही पीड़िता के बताए गए समय के दौरान उसके फोन पर कॉल भी चल रही थी।

दोनों बेटियों का दावा है कि पीड़िता ने अपनी उम्र छिपाई और खुद को नाबालिग साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि एम्स की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार घटना के समय पीड़िता 18 वर्ष से अधिक उम्र की थी।

ऐश्वर्या सेंगर ने यह भी आरोप लगाया कि पीड़िता ने अपने बयान कई बार बदले। पहले घटना का समय दोपहर 2 बजे बताया गया, फिर शाम 6 बजे और बाद में एफआईआर में इसे रात 8 से 8:30 बजे के बीच बताया गया।

उनका कहना है कि उनके पिता शुरू से ही नार्को और पॉलीग्राफी टेस्ट कराने के लिए तैयार थे, लेकिन पीड़ित पक्ष ने इसके लिए मना कर दिया। इसके बावजूद बिना ठोस सबूतों के उनके पिता को सजा दे दी गई।

ऐश्वर्या ने सवाल उठाया कि आखिर यह साबित करने का क्या प्रमाण है कि कुलदीप सेंगर ने अपराध किया। उन्होंने कहा कि अगर एक भी ठोस सबूत सामने आ जाए तो वह खुद अपने पिता को कड़ी सजा देने की मांग करेंगी।

पॉक्सो एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों पर भी बेटियों ने सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है कि पीड़िता नाबालिग थी।

दोनों बेटियों का यह भी आरोप है कि मामला राजनीतिक साजिश का शिकार हुआ। उनका कहना है कि अगर उनके पिता नेता नहीं होते तो उन्हें बहुत पहले न्याय मिल गया होता। उन्होंने दावा किया कि दूसरा पक्ष भी राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है और पीड़िता के परिवार का आपराधिक इतिहास रहा है।

पीड़िता के पिता की कस्टडी में हुई मौत को लेकर भी ऐश्वर्या ने कहा कि उस समय कुलदीप सेंगर शहर में मौजूद ही नहीं थे और उन पर साजिश के तहत आरोप लगाए गए। सड़क हादसे में पीड़िता के रिश्तेदारों की मौत को लेकर उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों ने इसे दुर्घटना करार दिया था।

इशिता सेंगर ने अपने बयान में कहा कि उनके पिता के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं और उन्हें सुने बिना ही दोषी मान लिया गया। उनका कहना है कि जांच में पूर्वाग्रह बरता गया और यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए सवाल उठाया कि क्या दोषसिद्धि के सभी कानूनी पहलुओं पर सही तरीके से विचार किया गया था। साथ ही अदालत ने न्यायपालिका को सार्वजनिक दबाव और सड़कों पर कानूनी लड़ाई ले जाने के खिलाफ भी चेतावनी दी है।

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