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थाईलैंड-कंबोडिया जंग: क्या चीन है इस युद्ध का प्रायोजक

दक्षिण-पूर्व एशिया में एक और युद्ध का मोर्चा खुल चुका है. थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद अब खुले युद्ध में तब्दील हो गया है. 24 जुलाई की सुबह से शुरू हुई इस जंग में अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है. दोनों देशों के बीच भारी गोलीबारी और हवाई हमले जारी हैं. ये संघर्ष ता मुएन थोम नामक प्राचीन मंदिर और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर है. इस युद्ध में चीन की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं.

खबरों के मुताबिक, कंबोडिया ने थाईलैंड की सीमा पर स्थित मिलिट्री पोस्ट पर अचानक गोलीबारी शुरू की. इसके बाद बीएम-21 रॉकेट लॉन्चर से थाईलैंड के अंदरूनी इलाकों को निशाना बनाया गया. जवाब में थाईलैंड ने 6 अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू विमान युद्ध में उतारे और हवाई हमले शुरू किए.

थाईलैंड के सुरिन, सिसाकेत और काप चोएंग जैसे सीमावर्ती प्रांतों में भारी तबाही हुई है. कई स्कूलों को खाली कराया गया और बच्चों को बंकरों में भेजा गया. थाईलैंड और कंबोडिया की सेनाएं फिलहाल सीमा पर आमने-सामने हैं.

इस युद्ध में चीन की भूमिका को लेकर कई संकेत मिल रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, कंबोडिया सैन्य रूप से थाईलैंड की तुलना में बहुत कमजोर है और बिना बाहरी मदद के इस स्तर की लड़ाई नहीं छेड़ सकता. ऐसे में माना जा रहा है कि चीन ही इस संघर्ष के पीछे है.

चीन, कंबोडिया का सबसे बड़ा निवेशक और सैन्य सहयोगी है. वहीं थाईलैंड को अमेरिका का सामरिक समर्थन प्राप्त है और उसके पास अमेरिकी एफ-16 जैसे आधुनिक हथियार हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस जंग के जरिए अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है. चीन का वन बेल्ट वन रोड (OBOR) प्रोजेक्ट थाईलैंड और कंबोडिया दोनों से होकर गुजरता है. बीजिंग चाहता है कि थाईलैंड में अमेरिका का प्रभाव घटे और वह इस क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए.

अगर यह युद्ध लंबा चलता है या फिर भविष्य में तनाव बढ़ता है, तो दोनों देशों को अपने रक्षा बजट में इजाफा करना पड़ेगा. थाईलैंड अमेरिकी हथियारों की ओर झुकेगा तो कंबोडिया चीन पर और अधिक निर्भर हो जाएगा. इसका सीधा फायदा चीन को होगा, जो इस पूरे युद्ध से दोनों देशों में अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है.

फिलहाल चीन ने दोनों पक्षों से शांति की अपील की है, लेकिन साथ ही वह कंबोडिया को हथियार भी मुहैया करवा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह युद्ध वास्तव में कंबोडिया की मर्जी से शुरू हुआ है या फिर यह चीन की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है?

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