धान खरीदी में तकनीकी बाधा, किसान परेशान

38 दिन बीतने के बाद भी कई किसानों की फसल पोर्टल की गड़बड़ियों की वजह से अधूरी खरीदी के झंझट में

बिलासपुर। प्रदेश में 15 नवंबर से धान खरीदी का महाअभियान शुरू हो चुका है, लेकिन 38 दिन बीत जाने के बाद भी कई किसान अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर हैं। किसान खेतों में पसीना बहाकर सोना उगाते हैं, लेकिन आज उन्हें एग्रिस्टेक पोर्टल की तकनीकी खामियों और रजिस्ट्रेशन में अटकावट का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि कई बार उनके दस्तावेज़ पूरे होने के बावजूद रकबा “शून्य” दिखा रहा है। इससे खरीदी नहीं हो पा रही है। किसान सवाल करते हैं कि जब रजिस्ट्रेशन समय पर हुआ और जमीन उनकी है, तो रकबा अपडेट क्यों नहीं हो रहा? इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिसे भरपाई कौन करेगा, यह स्पष्ट नहीं है।

समस्या से परेशान किसान अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि जिन किसानों को समस्या है, उन्हें उच्च स्तर पर भेजकर समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रदेश में धान खरीदी सबसे बड़ा वार्षिक अभियान है और इससे लाखों किसान जुड़े हैं। लेकिन एग्रिस्टेक पोर्टल की तकनीकी खामियां और प्रशासनिक देरी किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर रही हैं। अब सवाल यह है कि क्या तकनीकी गड़बड़ियां जल्द सुधरेंगी और किसान समय पर अपनी फसल बेच पाएंगे। फिलहाल, सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं और उम्मीद है कि जल्द समाधान निकले।

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