तालिबानी विदेश मंत्री मुत्तकी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, महिला पत्रकारों को दी प्राथमिकता

अफगान विदेशमंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत के सात दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने दिल्ली स्थित अफगान एम्बेसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया, जिसमें महिला पत्रकारों को पहली पंक्ति में बैठने का मौका मिला। इससे पहले शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल नहीं किया गया था, जिसे लेकर विवाद भी हुआ था। मुत्तकी ने इसे तकनीकी कारणों से बताया और कहा कि पिछली बार समय कम था, इसलिए सभी पत्रकारों को आमंत्रित नहीं किया गया।
उन्होंने महिलाओं की शिक्षा पर बात करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में कुल एक करोड़ विद्यार्थी स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें 28 लाख लड़कियां शामिल हैं। धार्मिक मदरसों में भी शिक्षा ग्रेजुएशन स्तर तक उपलब्ध है। मुत्तकी ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं की शिक्षा पर कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं है, बल्कि इसे अस्थायी व्यवस्था के तहत स्थगित किया गया है।
भारत के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि भारत के विदेश मंत्री से मुलाकात में अर्थव्यवस्था, व्यापार और अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने काबुल में अपने मिशन को एम्बेसी में अपग्रेड करने की घोषणा की और काबुल के डिप्लोमैट्स जल्द ही नई दिल्ली आएंगे। दोनों देशों के बीच उड़ानों की संख्या बढ़ाने और व्यापार के अवसर बढ़ाने पर भी सहमति बनी। अफगानिस्तान ने भारत को खनिज, कृषि और खेल क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया और वाघा बॉर्डर खोलने का अनुरोध किया।
मुत्तकी ने 2021 में मारे गए भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की याद करते हुए दुख जताया और कहा कि पिछले चार साल में अफगानिस्तान में कोई पत्रकार घायल नहीं हुआ। उन्होंने पाकिस्तान से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान की जनता से कोई दुश्मनी नहीं है, लेकिन कुछ लोग परेशानी पैदा कर रहे हैं। पाकिस्तान को अपने आतंकी समूहों को रोकने की जरूरत है।
उन्होंने तालिबानी झंडे की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह उनका झंडा है और इसके लिए जिहाद लड़ा गया। मुत्तकी ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान अब स्वतंत्र है और अपने दम पर खड़ा है। उन्होंने शांति की पहल की ओर संकेत करते हुए कहा कि बातचीत ही समाधान है, अन्यथा विकल्प मौजूद हैं।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने भारत-अफगानिस्तान संबंधों और तालिबानी दृष्टिकोण को उजागर किया, साथ ही महिला पत्रकारों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण संदेश के रूप में प्रस्तुत किया।





