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परिसीमन के खिलाफ दक्षिणी राज्यों की एकजुटता, स्टालिन का कड़ा विरोध

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जनसंख्या आधारित लोकसभा सीटों के परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिणी राज्य एकजुट हो गए हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अगुवाई में गठित संयुक्त समिति ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। 22 मार्च को चेन्नई के गिंडी में हुई बैठक में 25 सालों तक परिसीमन प्रक्रिया को रोकने और संविधान में संशोधन की मांग की गई।

केंद्र सरकार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध

केंद्र सरकार निर्वाचन क्षेत्रों को जनसंख्या के आधार पर पुनः परिभाषित करने की योजना बना रही है। दक्षिणी राज्यों का मानना है कि इससे उनकी लोकसभा सीटों की संख्या में भारी कमी आ सकती है। स्टालिन का दावा है कि यदि जनसंख्या के आधार पर पुनर्सीमन किया गया तो तमिलनाडु की मौजूदा 39 सीटों में से 8 से 9 सीटें घट सकती हैं। इसी प्रकार, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी सीटों की संख्या कम हो सकती है।

चेन्नई में हुई बैठक में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव, बीजद के अमर पटनायक और अन्य प्रमुख नेता शामिल हुए। सभी नेताओं ने स्पष्ट किया कि जनसंख्या आधारित परिसीमन उनके राज्यों के लिए अस्वीकार्य है।

अप्रैल में हैदराबाद में होगी अगली बैठक

संयुक्त समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि परिसीमन प्रक्रिया को 25 वर्षों के लिए स्थगित कर दिया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर संसद में घोषणा करने की मांग भी की। अब इस मुद्दे पर आगे की रणनीति बनाने के लिए अप्रैल में हैदराबाद में अगली बैठक आयोजित की जाएगी।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की इच्छा पर यह बैठक हैदराबाद में हो रही है। इसके बाद एक बड़ी सार्वजनिक बैठक भी आयोजित की जाएगी, जिसमें राज्य और राष्ट्रीय दलों के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। तेलंगाना कांग्रेस के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने कहा कि इन आयोजनों की तारीखें जल्द ही घोषित की जाएंगी और केरल, पंजाब और तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों ने इस पर सहमति भी दे दी है।

यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और दक्षिणी राज्यों ने साफ कर दिया है कि वे केंद्र सरकार के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करेंगे।

 

 

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