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जोकीहाट सीट पर फिर भिड़े तस्लीमुद्दीन के बेटे, तीन पूर्व मंत्री मैदान में – सीमांचल में बना हाई-प्रोफाइल मुकाबला

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीमांचल का जोकीहाट सीट इस बार सबसे चर्चित बन गई है। अररिया जिले की इस मुस्लिम बहुल सीट पर दो सगे भाई एक बार फिर आमने-सामने हैं। यहां मुकाबला जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार सरफराज आलम, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के शाहनवाज आलम, जेडीयू के मंजर आलम और एआईएमआईएम के मुर्शीद आलम के बीच त्रिकोणीय नहीं बल्कि चतुष्कोणीय हो गया है। चारों प्रमुख प्रत्याशियों का सरनेम ‘आलम’ होना इस चुनाव को और दिलचस्प बना रहा है।

जोकीहाट सीट पर दिवंगत तस्लीमुद्दीन का परिवार लंबे समय से दबदबा बनाए हुए है। तस्लीमुद्दीन पांच बार यहां से विधायक और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। उनके बड़े बेटे सरफराज आलम चार बार विधायक रह चुके हैं और एक बार अररिया से सांसद भी बने। इस बार वे जन सुराज पार्टी से चुनाव मैदान में हैं। वहीं उनके छोटे भाई शाहनवाज आलम, जिन्होंने 2020 में एआईएमआईएम के टिकट पर अपने बड़े भाई को हराया था, अब आरजेडी के प्रत्याशी हैं।

20 साल बाद जेडीयू ने मंजर आलम को फिर से मौका दिया है। वे 2005 में यहां से विधायक और बिहार सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रह चुके हैं। पिछले दो चुनावों में उन्हें टिकट नहीं मिला था। अब पार्टी ने फिर से उन पर भरोसा जताया है।

एआईएमआईएम ने अपने पुराने चेहरों में से एक मुर्शीद आलम को उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने सीमांचल में ओवैसी की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस बार उनके उतरने से मुकाबला और कड़ा हो गया है।

जोकीहाट सीट पर करीब 65 फीसदी मुस्लिम वोटर्स हैं। यही कारण है कि आज तक यहां किसी हिंदू प्रत्याशी को जीत नहीं मिली। अब तक हुए 16 चुनावों में तस्लीमुद्दीन और उनके बेटों को 11 बार जीत मिली है। इस बार यह सीट फिर चर्चा में है क्योंकि पारिवारिक मुकाबले के साथ तीन पूर्व मंत्री भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। सीमांचल का यह संघर्ष राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

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