SECL को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, अधिकारी का डिमोशन रद्द; तीन महीने में सभी सेवा लाभ लौटाने का आदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) को बड़ी राहत देने के बजाय कड़ा झटका दिया है। अदालत ने SECL द्वारा अपने एक अधिकारी पर की गई दंडात्मक कार्रवाई को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने अधिकारी का डिमोशन और वेतन वृद्धि रोकने का आदेश निरस्त करते हुए तीन महीने के भीतर सभी सेवा लाभ लौटाने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला SECL के लेखा अधिकारी रजनीश कुमार गौतम से जुड़ा है। प्रबंधन ने उन पर पूर्व सैनिकों की एजेंसियों से बकाया राशि की वसूली में विफल रहने का आरोप लगाया था। विभागीय जांच के बाद उन्हें एक साल के लिए निचले वेतनमान पर पदावनत कर दिया गया था।
इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अधिकारी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकल पीठ ने स्पष्ट कहा कि जिस काम की जिम्मेदारी किसी कर्मचारी को सौंपी ही नहीं गई हो, उसमें विफलता के लिए उसे सजा देना कानून के खिलाफ है।
कोर्ट ने रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि वर्ष 2012 के प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार याचिकाकर्ता की भूमिका केवल बिल प्राप्त करने और उन्हें आगे भेजने तक सीमित थी। बिलों की ऑडिट और वसूली की जिम्मेदारी क्षेत्रीय वित्त विभाग की थी, न कि लेखा अधिकारी की।
अदालत ने यह भी कहा कि अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने महत्वपूर्ण तथ्यों और प्रशासनिक नोटशीट की अनदेखी कर सजा सुनाई, जो कोल इंडिया के सेवा नियमों के विपरीत है।
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अधिकारी के खिलाफ जारी डिमोशन और इंक्रीमेंट रोकने के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त माना जाए। साथ ही SECL को तीन महीने के भीतर रुकी हुई सैलरी, एरियर और सभी सेवा लाभों का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
यह फैसला न सिर्फ संबंधित अधिकारी को राहत देता है, बल्कि कॉरपोरेट संस्थानों में नियमों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक अहम मिसाल भी माना जा रहा है।





