आरएसएस की बेंगलुरु बैठक: चार बड़े मुद्दों पर हुई चर्चा

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 21 मार्च से बेंगलुरु के चेन्नहल्ली में शुरू हुई। बैठक की शुरुआत संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने भारत माता को पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन के साथ की। इस बैठक में संघ कार्य पर एक वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें चार मुख्य मुद्दों पर चर्चा की गई।
उत्तर-दक्षिण विभाजन पर चिंता
संघ की रिपोर्ट में कहा गया कि समय-समय पर भाषा, प्रांत, जाति और पंथ के नाम पर राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने की कोशिशें होती रही हैं। सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंदा ने कहा कि डिलिमिटेशन (सीमा निर्धारण) के मुद्दे को लेकर दक्षिण भारत में भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्री के अनुसार, भविष्य में लोकसभा की सीटें राज्यों के वर्तमान अनुपात के हिसाब से ही बढ़ेंगी। संघ का मानना है कि भाषा और क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करने की जरूरत है, न कि उनसे अलगाव पैदा करने की।
मणिपुर के हालात में सुधार की उम्मीद
संघ की रिपोर्ट में मणिपुर में पिछले 20 महीनों से जारी हिंसा और तनाव पर चर्चा की गई। सीआर मुकुंदा ने कहा कि केंद्र सरकार और स्थानीय समाज की कोशिशों के चलते थोड़ी उम्मीद जगी है, लेकिन अभी भी स्थिति में सुधार की आवश्यकता है। संघ ने भी वहां शांति स्थापित करने के प्रयास किए हैं और यह काम जारी रहेगा।
बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चिंता
संघ ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। इसे मानवता के लिए शर्मनाक बताया गया है। रिपोर्ट में भारत सरकार की उन कोशिशों की भी तारीफ की गई है, जो वह बांग्लादेश सरकार से बातचीत और वैश्विक स्तर पर समर्थन जुटाने के लिए कर रही है। संघ ने हिंदुओं की सुरक्षा और सहायता की अपनी पुरानी स्थिति को दोहराया है।
महाकुंभ की सफलता पर सरकार की सराहना
संघ ने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की सराहना की। हालांकि, मौनी अमावस्या के दिन हुई दुर्घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया है।
एनआरसी पर संघ का रुख
एनआरसी (National Register of Citizens) के मुद्दे पर संघ का कहना है कि देश में रह रहे सभी लोगों की पहचान और पंजीकरण होना जरूरी है। हालांकि, इस पर विस्तृत चर्चा अभी नहीं हुई है।
संघ की इस वार्षिक रिपोर्ट से साफ है कि वह उत्तर-दक्षिण विभाजन, मणिपुर की स्थिति, बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा और महाकुंभ जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार के रुख का समर्थन कर रहा है।





