गणतंत्र दिवस स्पेशल: मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 3000 सैनिकों की परेड, 31 तोपों की सलामी
ऐसे मनाया गया था देश का पहला गणतंत्र दिवस

दिल्ली। आज जब देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, तब यह जानना दिलचस्प है कि 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस किस तरह मनाया था।
इसी दिन भारतीय संविधान लागू हुआ और देश एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। आज कर्तव्य पथ पर भव्य परेड, झांकियां और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन परंपरा बन चुकी है, लेकिन पहले गणतंत्र दिवस का आयोजन सादगी और भावनाओं से भरा हुआ था।
26 जनवरी की तारीख खास तौर पर चुनी गई थी, क्योंकि इसी दिन 1930 में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। जब 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया गया, तो इसे लागू करने के लिए जानबूझकर 26 जनवरी 1950 की तारीख तय की गई, ताकि स्वतंत्रता संग्राम की उस ऐतिहासिक भावना को सम्मान दिया जा सके।

पहले गणतंत्र दिवस की सुबह गवर्नमेंट हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। इसके बाद तिरंगा फहराया गया और 31 तोपों की सलामी दी गई। शाम को पूरी दिल्ली रोशनी से जगमगा उठी और जश्न का माहौल पूरे शहर में दिखाई दिया।
पहली गणतंत्र दिवस परेड आज के कर्तव्य पथ पर नहीं, बल्कि Irwin Amphitheatre (अब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम) में आयोजित हुई थी। इसमें करीब 3000 सैनिकों ने मार्च पास्ट किया और लगभग 15,000 दर्शकों ने इस ऐतिहासिक पल को देखा।
थलसेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों ने पहली बार एकसाथ अपने शौर्य का प्रदर्शन किया। आसमान में वायुसेना के पुराने लिबरेटर विमान उड़ते नजर आए, जो आजादी की लड़ाई की याद दिलाते थे।

विभाजन के घावों, शरणार्थियों की समस्या और आर्थिक कठिनाइयों के बीच मनाया गया यह दिन भारत की एकता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बन गया।
राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि यह दिन सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों की जीत है। यही वजह है कि पहला गणतंत्र दिवस आज भी इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय के रूप में याद किया जाता है।





