हिमाचल, उत्तराखंड और पंजाब में बारिश-बाढ़ का कहर, 350 से अधिक मौतें
4.07 लाख करोड़ का नुकसान का आकलन

दिल्ली। इस मानसून सीजन (24 जुलाई से 7 अगस्त) में हिमाचल प्रदेश में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। राज्य में अब तक 366 लोगों की मौत हुई है और लगभग ₹4.07 लाख करोड़ का संपत्ति नुकसान हुआ है। शिमला में 116% और कुल्लू में 113% अधिक बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से दोगुनी है। सिरमौर के नौहराधार में एक पहाड़ पूरी तरह से नदी में गिर गया, हालांकि वहां कोई बस्ती नहीं थी। भूस्खलन के कारण शिमला-ठियोग-रोहड़ू NH-705 दो दिन से बंद है, जिससे करीब 400 वाहन, जिनमें से कई सेब से लदे ट्रक हैं, फंसे हैं।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नौगांव में शनिवार शाम बादल फटने से बाजार और घरों में पानी और मलबा घुस गया। सड़क पर खड़ी कई गाड़ियां बह गईं। वहीं, उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना नदी शहर से 1 किमी दूर तक पहुंच गई, जिससे आश्रमों में 5 फीट तक पानी भर गया। वृंदावन का परिक्रमा मार्ग भी पानी में डूब गया।
पंजाब के 23 जिले अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। लुधियाना का ससराली बांध सतलुज नदी पर खतरे में है और रिंग बांध कटने लगा है। राजस्थान के राजसमंद में तेज बारिश से NH-162 का आधा हिस्सा बह गया। मौसम विभाग ने महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में रेड अलर्ट, गोवा में ऑरेंज और मध्य प्रदेश, बिहार समेत 20 राज्यों में यलो अलर्ट जारी किया है। हिमाचल प्रदेश में मानसून अब कमजोर पड़ रहा है, लेकिन शिमला-कुल्लू में सामान्य से दोगुनी बारिश दर्ज की गई।
देशभर में बाढ़ और भूस्खलन से फसलों, संपत्ति और लोगों को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन और पुलिस प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत कार्यों में जुटी हुई है। किसानों और आम जनता के लिए स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि मौसम विभाग लगातार अलर्ट जारी कर सावधानी बरतने की चेतावनी दे रहा है।





