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Railway Armor Trial: लालखदान हादसे से रेलवे ने लिया सबक, जहाँ हुई थी 12 मौतें, उसी ट्रैक पर शुरू हुआ ‘कवच’ का ट्रायल

सिग्नल तोड़ते ही खुद लग जाएगा ब्रेक, लालखदान हादसे के बाद जागा रेलवे

कहते हैं हादसा होने के बाद ही प्रशासन की नींद टूटती है। (Railway Armor Trial) बिलासपुर रेल मंडल में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। जिस बिलासपुर–जयरामनगर रेलखंड पर कुछ महीने पहले हुए एक भीषण हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया था, अब उसी ट्रैक पर रेलवे ने सुरक्षा की सबसे आधुनिक तकनीक ‘कवच’ का ट्रायल शुरू किया है। 4 नवंबर को हुई उस दर्दनाक घटना से सबक लेते हुए रेलवे अब यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर आ रहा है। कैसे काम करेगा यह सिस्टम और क्या भविष्य में टल सकेंगे हादसे, देखिए यह रिपोर्ट।

देर आए दुरुस्त आए, जिस ट्रैक पर बिखरी थीं लाशें, अब वहां तैनात हुआ सुरक्षा का ‘कवच’

यह वही बिलासपुर–जयरामनगर रेलखंड है, जो 4 नवंबर को चीख-पुकार से गूंज उठा था। लालखदान के पास गेवरा–बिलासपुर मेमू ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर में लोको पायलट समेत एक दर्जन से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। जांच में साफ़ हुआ था कि अगर इस रूट पर ‘कवच’ सिस्टम होता, तो शायद यह हादसा न होता।

भारी कीमत चुकाने के बाद आखिरकार रेलवे ने सुध ली है। अब इसी सेक्शन में कवच लोकोमोटिव का सघन ट्रायल शुरू कर दिया गया है। ट्रायल के दौरान पटरी पर लगे आरएफआईडी टैग्स और सिग्नल सिस्टम के तालमेल को परखा गया। अधिकारियों ने चेक किया कि आपात स्थिति में या ड्राइवर की गलती होने पर ट्रेन का ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम काम कर रहा है या नहीं।

रेलवे का दावा है कि ‘कवच’ मानवीय भूलों पर लगाम लगाएगा, (Railway Armor Trial) 

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में इस कवच परियोजना पर करीब 1,654 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। नागपुर–झारसुगुड़ा जैसे अति-व्यस्त रूट पर भी इसे लगाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। रेलवे का दावा है कि ‘कवच’ मानवीय भूलों पर लगाम लगाएगा। अगर लोको पायलट सिग्नल तोड़ता है या उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन आ जाती है, तो कवच सिस्टम ट्रेन को अपने आप रोक देगा। बहरहाल, लालखदान हादसे के जख्म अभी भरे नहीं हैं, लेकिन उम्मीद है कि यह नई तकनीकी ढाल भविष्य में किसी और परिवार को उजड़ने से बचा लेगी।

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