बिहार चुनाव से पहले राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ से बढ़ी हलचल

गया: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकालकर सियासी हलचल तेज कर दी है। रविवार को सासाराम से शुरू हुई यह यात्रा सोमवार को गया पहुंची, जहां राहुल ने सूर्य देव मंदिर में पूजा-अर्चना की और जनसभा को संबोधित किया। रात का विश्राम भी उन्होंने गया के रसलपुर क्रिकेट ग्राउंड में किया।

इस यात्रा का मकसद कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक रहे दलित और मुस्लिम समुदाय को फिर से साधना है। तेजस्वी यादव और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य नेताओं की मौजूदगी ने इस यात्रा को और खास बना दिया है। कांग्रेस पिछले तीन दशकों से बिहार में अपने दम पर सत्ता में नहीं आ सकी है और अब वह इस अभियान के जरिए खोया हुआ जनाधार वापस पाने की कोशिश में है।

राहुल गांधी की यह यात्रा 16 दिन तक चलेगी और 20 जिलों से होते हुए लगभग 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। यह 1 सितंबर को पटना में ऐतिहासिक गांधी मैदान में ‘वोटर अधिकार रैली’ के साथ समाप्त होगी। कांग्रेस ने रणनीतिक तौर पर इस यात्रा की शुरुआत सासाराम से की, जिसे दलित राजनीति का गढ़ माना जाता है।

गया जिला, जहां यात्रा का दूसरा पड़ाव है, दलित बहुल इलाका है। यहां की 10 विधानसभा सीटों में पिछली बार एनडीए और महागठबंधन को बराबर-बराबर पांच सीटें मिली थीं। हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया था, जिससे यह इलाका दोनों खेमों के लिए अहम माना जाता है।

राहुल गांधी ने हाल के दौरों में दलित वोटरों को साधने के लिए कई कार्यक्रम किए, जिनमें दशरथ मांझी के परिवार से मुलाकात भी शामिल है। कांग्रेस की कोशिश है कि महागठबंधन के साथ मिलकर वह दलित-मुस्लिम समीकरण को मजबूत करे और आने वाले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करे।

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