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एक साल से थमी सड़कों की गुणवत्ता जांच, अफसरों की व्यस्तता से निगरानी व्यवस्था बेपटरी

प्रदेश में सड़कों की खराब हालत के पीछे लोक निर्माण विभाग की सुस्त और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली बड़ी वजह बनती जा रही है। स्थिति यह है कि बीते एक साल से सड़कों की गुणवत्ता जांच लगभग ठप पड़ी है। अधिकारियों के पास अपने-अपने जोन के काम से फुर्सत नहीं है, जिससे दूसरे जोन में जाकर निरीक्षण करने की व्यवस्था कागजों तक सीमित रह गई है।

लोक निर्माण विभाग ने गुणवत्ता जांच के नियमों में बदलाव करते हुए हर जोन के लिए विशेष जांच टीम गठित की थी। इन टीमों में प्रमुख अभियंता, मुख्य अभियंता और कार्यपालन अभियंता को शामिल किया गया है और इन्हें अपने जोन के बजाय दूसरे जोन की सड़कों की जांच का जिम्मा दिया गया। हालांकि काम का अत्यधिक दबाव और समय की कमी के कारण अधिकारी दूसरे जोन में जाकर निरीक्षण नहीं कर पा रहे हैं।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक टीम गठन के बावजूद पिछले आठ महीनों से नियमित गुणवत्ता जांच नहीं हो सकी है। निगरानी के अभाव में प्रयोगशालाएं भी लंबे समय तक निष्क्रिय रहीं, जिससे सीमेंट, रेत, गिट्टी और बिटुमिन जैसी निर्माण सामग्री की जांच नहीं हो पाई। इसका सीधा असर सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर पड़ा और कई नई सड़कें कुछ ही दिनों में उखड़ने लगीं।

बीते महीनों में कई बड़े मामले सामने आए हैं, जहां करोड़ों की लागत से बनी या मरम्मत की गई सड़कें 24 घंटे के भीतर ही खराब हो गईं। जांच के बाद कुछ मामलों में अधिकारियों को निलंबित भी किया गया, लेकिन व्यवस्था में सुधार नजर नहीं आ रहा है।

प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के अधीन हजारों किलोमीटर लंबी सड़कें हैं, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, मुख्य सड़कें और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। इसी वित्तीय वर्ष में सैकड़ों किलोमीटर नई सड़कें बनाई गईं, लेकिन बदली हुई जांच प्रणाली के कारण इनकी नियमित गुणवत्ता जांच नहीं हो पा रही है।

रायपुर स्थित पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय प्रयोगशाला भी करीब एक साल से बंद पड़ी है, जिससे तकनीकी परीक्षण पूरी तरह प्रभावित हुआ है। विभाग का दावा है कि निर्माण कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा रहा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।

सड़कों की बदहाल स्थिति और जांच व्यवस्था की सुस्ती ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते नियमित निरीक्षण और तकनीकी जांच की व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो आने वाले समय में सड़क दुर्घटनाओं और सरकारी नुकसान का खतरा और बढ़ सकता है।

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