कैदी ने पूरी सजा के बावजूद 4.7 साल अतिरिक्त जेल में बिताए, सुप्रीम कोर्ट ने 25 लाख मुआवजे का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह सागर जिले के सोहन सिंह को 25 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर दे। अदालत ने कहा कि किसी दोषी को उसकी वैध सजा से अधिक समय तक जेल में रखना कानून और उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने इसे गंभीर चूक बताया और कहा कि ऐसी भूल किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
मामला तब सामने आया जब यह पता चला कि सोहन सिंह को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2017 में सात साल की सजा सुनाई थी, जबकि 2005 में सत्र न्यायालय ने उसे बलात्कार, घर में घुसपैठ और धमकी के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने अभियोजन की खामियों और सबूतों की कमी के कारण सजा घटाई थी। इसके बावजूद सोहन सिंह को अदालत द्वारा तय की गई अधिकतम सजा से कहीं अधिक, यानी चार साल सात महीने अतिरिक्त जेल में रखा गया।
सोहन सिंह ने इस अत्याचार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं बल्कि पूरे न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाता है। खंडपीठ ने राज्य सरकार से दो हफ्तों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।
सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नचिकेता जोशी ने बताया कि सोहन सिंह कुछ समय के लिए जमानत पर भी बाहर था, इसलिए अतिरिक्त कारावास लगभग साढ़े चार वर्ष हुआ। वहीं, सोहन सिंह के वकील महफूज अहसन नाजकी ने कहा कि चाहे अवधि कितनी भी रही हो, यह पीड़ित की स्वतंत्रता का हनन है और राज्य जिम्मेदार है।
अदालत ने निर्देश दिए कि मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सभी जेलों में सर्वेक्षण करे, ताकि भविष्य में किसी कैदी को उसकी सजा पूरी होने या जमानत मिलने के बाद जेल में न रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और न्यायपालिका का कर्तव्य है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाए, ताकि नागरिकों का न्याय व्यवस्था में विश्वास बना रहे।





