प्रशांत किशोर तेजस्वी यादव के खिलाफ नहीं लड़ेंगे, जनसुराज ने राघोपुर से चंचल सिंह को बनाया उम्मीदवार

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर नई रणनीति सामने आई है। जनसुराज पार्टी ने राघोपुर विधानसभा सीट से अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। इस सीट से पार्टी ने चंचल सिंह को मैदान में उतारा है, जबकि इस सीट पर प्रशांत किशोर खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। इससे स्पष्ट हो गया है कि प्रशांत किशोर के चुनावी दांव अब कम संभावनाशील हैं। उनके रोहतास जिले की करगहर और वैशाली जिले की राघोपुर सीट पर ही चुनाव लड़ने की संभावना थी, लेकिन इन दोनों ही सीटों पर जनसुराज ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।

जनसुराज पार्टी ने 13 अक्टूबर को अपनी दूसरी सूची जारी की थी, जिसमें कुल 65 उम्मीदवारों के नाम शामिल थे। इसके पहले 9 अक्टूबर को पहली सूची में 51 सीटों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए थे। पार्टी ने बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

सूची में वाल्मीकिनगर से दिग नारायण प्रसाद, लौरिया से सुनील कुमार, हरसिद्धि से अवधेश राम, ढाका से लाल बहादुर प्रसाद, सुरसंड से उषा किरण, रुन्नीसैदपुर से विजय कुमार साह, बेनीपट्टी से मोहम्मद परवेज आलम, निर्मली से राम प्रवेश कुमार यादव और सिकटी से राघिब बबलू को उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा कोचाधामन से अबु फारूक, अमनौर से अरफोज आलम, बायसी से शाहनवाज आलम और प्राणपुर से कुणाल निषाद को मैदान में उतारा गया है।

दरभंगा से आरके मिश्रा, मुजफ्फरपुर से डॉ. अमन कुमार दास, गोपालगंज से डॉ. शशि शेखर सिन्हा, रघुनाथपुर से राहुल कीर्ति सिंह, सहरसा से किशोर कुमार मुन्ना, छपरा से जयप्रकाश सिंह, सोनपुर से चंदन लाल मेहता और मोतिहारी से डॉ. अरुण कुमार को भी उम्मीदवार बनाया गया है।

बिहारशरीफ से दिनेश कुमार, पटना कुम्हरार से केसी सिन्हा, नालंदा से कुमारी पूनम सिन्हा, आरा से विजय कुमार गुप्ता, करहगर से रितेश रंजन पांडेय, गोह से सीताराम दुखारी, नबीनगर से अर्चना चंद्रा, बोधगया से लक्ष्मण मांझी, दरभंगा (ग्रामीण) से शोएब खान और बनियापुर से श्रवण कुमार महतो जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरेंगे।

पार्टी के इस फैसले से यह संकेत मिलता है कि प्रशांत किशोर ने खुद की राजनीतिक छवि और रणनीति को ध्यान में रखते हुए तेजस्वी यादव के खिलाफ मुकाबले से दूरी बनाई है। राघोपुर सीट पर चंचल सिंह की उम्मीदवारी अब चुनावी दल और मतदाताओं के लिए अहम चुनौती बनेगी।

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