भारत-चीन सीमा वार्ता में सकारात्मक बातचीत, लेकिन पूर्वी लद्दाख में तनाव अब भी बरकरार

भारत और चीन के बीच बीजिंग में ‘वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन’ (WMCC) की 35वीं बैठक आयोजित हुई। दोनों देशों ने बातचीत को सकारात्मक और भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बताया, लेकिन पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की पूरी तरह वापसी अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि सीमा पर स्थिरता से द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने में मदद मिल रही है।
वार्ता के दौरान सीमा निर्धारण, बॉर्डर मैनेजमेंट, नए तंत्र बनाने और सीमा पार सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारतीय पक्ष ने सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी अंतरराष्ट्रीय नदियों से जुड़े मामलों पर विशेषज्ञ स्तर की बैठक जल्द आयोजित करने की मांग भी रखी।
दोनों देश जल्द होने वाली ‘स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स’ (SR) बैठक की तैयारी पर भी सहमत हुए। इसके अलावा सैन्य और राजनयिक स्तर पर नियमित संपर्क बनाए रखने का फैसला लिया गया।
हालांकि कूटनीतिक बातचीत में नरमी दिखाई दी, लेकिन जमीनी हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में शुरू हुए सीमा तनाव के बाद से दोनों देशों के हजारों सैनिक भारी हथियारों के साथ अग्रिम मोर्चों पर तैनात हैं।
कुछ इलाकों जैसे गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो में सैनिक पीछे हटे हैं, लेकिन डेमचोक और डेपसांग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुई है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि अप्रैल 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल हुए बिना दोनों देशों के संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकते।
इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई होउ यानकी ने की।





