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Ponds Will be Revived: 2 हजार चंदेलकालीन तालाबों को पुनर्जीवित करेगी सरकार

भोपाल। सूखा और पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए सरकार एक अहम कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की आधारशिला रखने के बाद अब सरकार ने बुंदेलखंड के 2 हजार चंदेलकालीन तालाबों को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना के तहत पंचायत विभाग, जल संरक्षण पर काम करने वाली संस्थाओं (NGOs) और स्थानीय लोगों की मदद से इन तालाबों की मरम्मत की जाएगी।

चंदेलकालीन तालाबों का महत्व

बुंदेलखंड क्षेत्र में 9वीं से 16वीं शताब्दी तक चंदेलों का शासन था। उस समय चंदेल राजाओं ने पानी को सहेजने के लिए कई तालाब, बांध और बावड़ियां बनवाई थीं। इन तालाबों की तकनीक ऐसी थी कि एक तालाब भरने पर उसका पानी दूसरे तालाब में चला जाता था, जिससे पानी की कमी को रोका जा सके। अब सरकार इन तालाबों की मरम्मत करने के साथ-साथ उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने पर काम करेगी।

कार्यशाला का आयोजन

4 फरवरी को बुंदेलखंड के चंदेला-बुंदेला तालाबों पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें जल पुरुष राजेंद्र सिंह, पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल और जल संरक्षण कार्य करने वाले कई एक्सपर्ट्स ने इन तालाबों की स्थिति और मरम्मत के उपायों पर चर्चा की।पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि

बुंदेलखंड में जल संकट को दूर करने के लिए जरूरी है कि तालाबों का कैचमेंट क्षेत्र बढ़ाया जाए। इसके अलावा, यदि किसी तालाब या जल स्त्रोत के रास्ते में कोई अवरोध हो, तो उसे हटाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को जल निकासी के रास्तों में बने अवरोधों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।

तालाबों में सुधार के लिए अगले कदम

मंत्री ने यह भी कहा कि तालाबों में डीसिल्टिंग (कीचड़ निकालने) की ज्यादा जरूरत नहीं है, क्योंकि इन तालाबों की संरचना पहले ही जल भंडारण के लिए उपयुक्त है। उनका मुख्य फोकस तालाबों के रास्तों को खोलने और पानी के प्रवाह को सुरक्षित रखना होगा। इसके साथ ही, जहां भी आवश्यक हो, वहां पुलिया जैसी संरचनाएं बनाई जाएंगी ताकि बरसाती पानी का रुकना रोका जा सके।

 

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