92 की उम्र में फिर राष्ट्रपति पद की दौड़ में पॉल बिया, भारत में भी 90 पार नेताओं की सक्रिय सियासत

याओउन्दे (कैमरून):कैमरून के 92 वर्षीय राष्ट्रपति पॉल बिया ने ऐलान किया है कि वह आठवीं बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ेंगे। सोमवार को उनके इस फैसले ने कई महीनों से चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया। दुनिया के सबसे उम्रदराज राष्ट्र प्रमुखों में शुमार बिया 1982 से सत्ता में हैं और अगर यह चुनाव जीतते हैं तो उनका अगला कार्यकाल 2032 तक चलेगा, जब उनकी उम्र 99 वर्ष होगी।

बिया अक्सर बीमार रहते हैं और ज्यादातर समय विदेश में रहते हैं। पिछले वर्ष उनके निधन की अफवाहों के बीच सरकार को सफाई देनी पड़ी थी। बावजूद इसके, उन्होंने सोशल मीडिया पर देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे देश की सेवा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

एशिया में भी राजनीति में उम्र बाधा नहीं रही। मलेशिया के महातिर मोहम्मद 100 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। वे 97 वर्ष की उम्र में चुनाव भी लड़ चुके हैं और नई पार्टी की स्थापना की थी।

भारत में भी कई नेता 90 की उम्र के बाद भी सक्रिय राजनीति में हैं। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा 92 वर्ष की उम्र में राज्यसभा सांसद हैं। डीएमके नेता एम. करुणानिधि ने 93 की उम्र में विधानसभा चुनाव जीता था। वामपंथी नेता वीएस अच्युतानंदन ने 97 की उम्र तक प्रशासनिक सुधार आयोग का नेतृत्व किया।

94 वर्षीय शफीकुर्रहमान बर्क भारत के सबसे बुजुर्ग लोकसभा सांसद रहे। वहीं, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी क्रमशः 97 और 91 वर्ष के हो चुके हैं, हालांकि अब सक्रिय राजनीति से दूर हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (82), शरद पवार (84) और फारूक अब्दुल्ला (87) जैसे वरिष्ठ नेता अभी भी राजनीतिक तौर पर सक्रिय हैं, जो दर्शाता है कि उम्र राजनीतिक आकांक्षाओं में बाधा नहीं है।

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