छत्तीसगढ़: निजी स्कूलों और यूनिवर्सिटी की मनमानी से अभिभावक परेशान, सरकार ने लिया एक्शन

रायपुर। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों की मनमानी फिर सामने आने लगी है। सरकार के साफ निर्देशों के बावजूद कई स्कूल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगवा रहे हैं, जबकि सरकार ने स्पष्ट कहा है कि केवल सरकारी किताबें ही पढ़ाई जाएं।
सरकार का आदेश:सिर्फ SCERT और NCERT की किताबें ही चलेंगी
जिला शिक्षा कार्यालय ने आदेश जारी करते हुए साफ कहा है कि सभी निजी स्कूलों को केवल छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम (SCERT) या एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें ही पढ़ानी होंगी।
छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में मुफ्त किताबें लगाई जाएंगी।
सीबीएसई स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही मान्य होंगी।
किसी भी निजी प्रकाशक की किताबें लगाने की अनुमति नहीं होगी।
स्कूलों को प्रमाण पत्र देना होगा कि वे इस आदेश का पालन कर रहे हैं। साथ ही, स्कूल परिसर में जूता, मोजा, टाई-बेल्ट जैसी चीजों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।
अभिभावकों की जेब पर भारी महंगी किताबें
अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल चुनिंदा दुकानों से ही महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
नर्सरी से तीसरी तक की किताबों की कीमत 3000 से 3500 रुपए तक पहुंच गई है।
कक्षा 5 से 8 तक की किताबों के लिए 5000 से 7000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं।
स्कूल सरकारी किताबों के साथ 3-4 निजी प्रकाशकों की किताबें भी अनिवार्य कर रहे हैं।
निजी स्कूलों का विरोध: किताबें नहीं मिलीं, पढ़ाई कैसे करें?
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस आदेश पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कई स्कूलों को अब तक सरकारी किताबें मिली ही नहीं हैं, जबकि सत्र की शुरुआत अप्रैल में हो चुकी है।
एसोसिएशन ने दावा किया कि हाईकोर्ट ने पहले ही कहा है कि निजी स्कूल अगर चाहें तो अपनी मर्जी से किताबें चुन सकते हैं और उन पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
अब यूनिवर्सिटी की मनमानी भी सामने आई
पं. दीनदयाल उपाध्याय आयुष विश्वविद्यालय ने मेडिकल परीक्षाओं की फीस लगभग दोगुनी कर दी है।
बीएससी नर्सिंग की परीक्षा फीस पहले 1559 रुपए थी, अब सीधे 3000 रुपए हो गई है।
हर कोर्स में यही हाल है।
छात्रों का कहना है कि यह गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़ा झटका है। छात्रवृत्ति पाने वाले या अमीर छात्रों पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जिनकी पढ़ाई लोन पर चल रही है, उनके लिए यह बहुत मुश्किल है।
निजी स्कूलों की मनमानी किताबें और अब विश्वविद्यालय की बढ़ी फीस- दोनों ने अभिभावकों और छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सख्ती की ज़रूरत महसूस हो रही है ताकि शिक्षा को व्यापार बनने से रोका जा सके।





