वक्फ संशोधन बिल को लेकर विपक्ष का विरोध, बिल पर उठाए सवाल

  दिल्ली। वक्फ संशोधन बिल को लेकर विपक्षी दलों में असहमति सामने आ रही है। क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (RSP) के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने मंगलवार को इस बिल को “बिलकुल नया बिल” बताया और कहा कि मौजूदा बिल को निरस्त किया जाएगा। मीडिया से बात करते हुए प्रेमचंद्रन ने कहा, “अब तक, यह बिल आज के एजेंडे में नहीं है। सरकार यह तय करेगी कि इसे कब सदन में पेश किया जाए। JPC की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए नया बिल लाया जा रहा है। यह बिल एकदम नया होगा और मौजूदा बिल को निरस्त किया जाएगा।”

कांग्रेस सांसद किरण कुमार चमला ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा, “JPC में इसे पास किया गया था और लोकसभा में लाया गया था, लेकिन विपक्षी दल इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं क्योंकि यह असंवैधानिक है। बीजेपी इस बिल को लागू करने के लिए सभी प्रक्रियाओं को दरकिनार करना चाहती है।” कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी सरकार के रवैये पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “हम प्रभावित लोगों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए खड़े रहेंगे।”

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने इस बिल के खिलाफ अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “हम वक्फ बोर्ड बिल के खिलाफ हैं क्योंकि बीजेपी हर जगह हस्तक्षेप करना चाहती है।” आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने भी इस बिल पर आपत्ति जताई और सवाल किया कि जब सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट में यह कह चुकी है कि वक्फ संपत्तियों का 99% डिजिटलीकरण हो चुका है, तो फिर इस बिल की जरूरत क्यों पड़ी?

वक्फ संशोधन बिल, जिसे ‘यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एंपावरमेंट, एफिशिएंसी, और डेवलपमेंट (UMEED) बिल’ कहा जा रहा है, वक्फ संपत्तियों से जुड़े कई मुद्दों को हल करने के लिए लाया जा रहा है। यह बिल डिजिटलाइजेशन, ऑडिट्स की प्रक्रिया, पारदर्शिता और अवैध रूप से कब्जाए गए वक्फ संपत्तियों को वापस हासिल करने के लिए कानूनी तंत्र को मजबूत करने का प्रस्ताव करता है। वक्फ एक्ट 1995 के तहत वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन किया जाता है, लेकिन लंबे समय से इस एक्ट पर भ्रष्टाचार, अनियमितता और कब्जे की समस्याओं को लेकर आलोचना की जा रही है।

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