Et af de længst eksisterende offshore-navne er stadig Queenvegas selvom konkurrencen er blevet hård. I sammanställningar av nyare alternativ förekommer Slotser casino som ett av flera mindre kända varumärken. Bland mindre etablerade sajter återfinns Newlucky casino som har en relativt enkel webbplats men ett brett spelutbud. För dem som vill veta mer om sajter utan begränsningar kan man klicka här och bläddra bland alternativen. Among lion-themed brand entries is www.leoncasino.nu which sits alongside several similar names. För spelare som är nyfikna på bonus buy-mekaniken kan man läs mer här för en bredare överblick.

तेलंगाना में ओबीसी आरक्षण बढ़ा, 23% से बढ़ाकर 42% करने की घोषणा

तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 23% से बढ़ाकर 42% करने का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में यह घोषणा करते हुए कहा कि यह फैसला ओबीसी समुदाय को शिक्षा, नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अधिक अवसर देने के उद्देश्य से लिया गया है।

62% हो जाएगा कुल आरक्षण

ओबीसी आरक्षण को बढ़ाने से राज्य में कुल आरक्षण सीमा 62% तक पहुंच जाएगी। अगर इसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का 10% आरक्षण जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 72% तक हो जाएगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% आरक्षण सीमा को पार कर रहा है, जिससे कानूनी दिक्कतें आने की संभावना है।

वैज्ञानिक और कानूनी आधार पर फैसला

सीएम रेवंत रेड्डी ने बताया कि यह फैसला वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर लिया गया है। उन्होंने राज्य में पिछड़े वर्गों की आबादी 56.36% होने का दावा किया और इसी आधार पर आरक्षण सीमा बढ़ाने की बात कही। सरकार ने इस फैसले को लागू करने के लिए दो विधेयक पेश किए हैं – एक शिक्षा, सरकारी नौकरियों और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए, और दूसरा ग्रामीण व शहरी स्थानीय निकायों के लिए।

संविधान संशोधन और केंद्र की मंजूरी जरूरी

तेलंगाना सरकार को इस फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए संविधान में संशोधन और केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत होगी। अगर केंद्र से मंजूरी नहीं मिलती है, तो यह प्रस्ताव केवल कागज़ों तक ही सीमित रह सकता है।

बिहार जैसा न हो तेलंगाना का हाल

इससे पहले बिहार सरकार ने भी आरक्षण सीमा बढ़ाकर 75% कर दी थी, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अगर तेलंगाना का मामला भी अदालत में जाता है, तो इस फैसले पर रोक लगाई जा सकती है।

मराठा और जाट आरक्षण की तरह न हो हालत

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण और हरियाणा में जाट आरक्षण भी सुप्रीम कोर्ट में रद्द हो चुके हैं। दोनों मामलों में अदालत ने 50% से अधिक आरक्षण देने को असंवैधानिक बताया था।

आंध्र प्रदेश में मुस्लिम आरक्षण भी हुआ रद्द

आंध्र प्रदेश में मुस्लिमों को दिए गए 5% आरक्षण को भी अदालत ने खारिज कर दिया था। अदालत का मानना था कि धार्मिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।

तेलंगाना सरकार की कानूनी तैयारी

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने साफ किया है कि उनकी सरकार इस फैसले के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी। उन्होंने कहा कि जब तक ओबीसी को 42% आरक्षण नहीं मिलता, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे।

तेलंगाना में बढ़ा हुआ ओबीसी आरक्षण लागू होगा या नहीं, यह देखना बाकी है। लेकिन इस फैसले ने राज्य की राजनीति में हलचल जरूर मचा दी है।

 

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई