कांग्रेस को सरकारी बंगलों से बेदखली का नोटिस, 2006 की नीति बनी वजह

केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। मामला दिल्ली में स्थित दो सरकारी बंगलों को खाली कराने के नोटिस से जुड़ा है। कांग्रेस को 24 अकबर रोड स्थित अपने मुख्यालय और 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस कार्यालय को खाली करने के लिए कहा गया है।
बताया गया है कि ये नोटिस 13 मार्च को भेजे गए थे, जिसमें पार्टी को निर्धारित समय सीमा के भीतर परिसर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। कांग्रेस इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।
इस पूरे मामले की जड़ 2006 की उस नीति में है, जिसके तहत राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को कार्यालय निर्माण के लिए जमीन आवंटित की जाती है। नियमों के अनुसार, यदि कोई पार्टी नई जमीन पर अपना कार्यालय बना लेती है, तो उसे पहले से आवंटित सरकारी बंगले तीन साल के भीतर खाली करने होते हैं।
कांग्रेस को दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर नई जमीन आवंटित की गई थी, जहां ‘इंदिरा भवन’ का निर्माण पूरा हो चुका है और इसे पार्टी मुख्यालय बनाया जा चुका है। इसके बावजूद पार्टी ने अकबर रोड और रायसीना रोड स्थित पुराने परिसरों को खाली नहीं किया।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इन बंगलों का आवंटन वर्ष 2013 में ही रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद कब्जा जारी रहने को नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
ऐसा ही मामला भारतीय जनता पार्टी के साथ भी सामने आया था, जिसने नया मुख्यालय बनने के बाद भी कुछ समय तक पुराने सरकारी बंगले पर कब्जा बनाए रखा था। बाद में उसे खाली किया गया।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि 2006 की नीति के तहत सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से नियम लागू होते हैं और नई व्यवस्था के बाद पुराने आवास खाली करना अनिवार्य है। इसी प्रक्रिया के तहत अब कार्रवाई की जा रही है।





