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एयर डिफेंस में भारत की बड़ी कामयाबी, प्रोजेक्ट कुशा के ट्रायल सफल

भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के पहले डेवलपमेंट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। यह उपलब्धि देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

इस परियोजना में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड भी प्रमुख भूमिका निभा रही है। हालिया परीक्षणों में ग्राउंड वैलिडेशन और ड्यूल-पल्स रॉकेट मोटर जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया। अब यह प्रोजेक्ट अगले चरण ‘इंटीग्रेटेड फ्लाइट टेस्ट’ की ओर बढ़ रहा है, जिसकी शुरुआत इसी वर्ष होने की संभावना है।

प्रोजेक्ट कुशा, जिसे एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम के नाम से भी जाना जाता है, एक स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है। इसे उन्नत विदेशी सिस्टम के समकक्ष विकसित किया जा रहा है। लगभग 21,700 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण शहरों और सैन्य ठिकानों को मजबूत सुरक्षा प्रदान करना है।

इस प्रणाली की खासियत इसकी तीन-स्तरीय रक्षा क्षमता है। इसमें अलग-अलग दूरी की तीन इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं, जो विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों को अलग-अलग स्तर पर रोकने में सक्षम होंगी। यह सिस्टम फाइटर जेट, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को पहचानकर उन्हें नष्ट कर सकता है।

तय समयसीमा के अनुसार, वर्ष 2026 में फ्लाइट टेस्ट की शुरुआत होगी, 2028 तक इसकी प्रारंभिक तैनाती की जाएगी और 2030 तक इसे पूरी तरह से तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय वायुसेना द्वारा इस परियोजना के लिए कई स्क्वाड्रन की आवश्यकता को मंजूरी दी जा चुकी है।

यह परियोजना देश के व्यापक एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।

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