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जम्मू-कश्मीर के राजौरी सीमा क्षेत्र में शेलिंग के बाद सामान्य जीवन लौटा, स्थानीय लोगों ने स्थायी शांति की उम्मीद जताई

राजौरी। भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को युद्धविराम समझौते के बाद जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में धीरे-धीरे सामान्य जीवन लौटने लगा है। हालांकि भय और सतर्कता अभी भी बनी हुई है, स्थानीय लोग अपने रोज़मर्रा के कामकाज को फिर से शुरू कर रहे हैं और दुकानें खोल रहे हैं। पिछले दिनों की तीव्र शेलिंग ने इलाके में भारी तबाही मचाई थी, जिससे जनता को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

स्थानीय होटल कर्मचारी नीरस ने मीडिया से बातचीत में बताया, “शेलिंग शुरू होते ही हमने अपनी दुकानें बंद कर लीं और घर चले गए। अब भी हम शाम 4-5 बजे तक दुकानें बंद कर देते हैं और जल्दी सुबह फिर से दुकान खोलते हैं। पहले बाजार में दिन के समय ग्राहक आते थे, लेकिन अब ग्राहक कम हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि बाजार में कुछ हलचल जरूर है, लेकिन डर का माहौल बना हुआ है। “स्कूल और मदरसे अभी भी बंद हैं। बच्चे मदरसों से घर लौटाए गए हैं। बाजार पूरी तरह से सामान्य नहीं हुआ है।”

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एक और स्थानीय निवासी खलीलुर रहमान ने कहा कि युद्धविराम से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अनिश्चितता अभी बनी हुई है। “दुकानें खुल गई हैं और आवश्यक सामान खरीदा जा रहा है, लेकिन लोग अभी भी डर के साये में हैं। उम्मीद है कि अगर शांति बनी रहे तो जीवन पूरी तरह सामान्य हो जाएगा।” उन्होंने आर्थिक स्थिति की भी चिंता जताई, “मध्यम वर्गीय परिवार जो रोज कमाते और खाते हैं, उनके लिए यह अस्थिरता बहुत कठिन है। जब शेलिंग होती है तो सब कुछ थम जाता है। ऐसे लोगों के लिए जीविका चलाना मुश्किल हो जाता है।”

85 वर्षीय एक बुजुर्ग ने शांति की गुहार लगाई, “मैंने 1947, 1965 और 1971 के युद्ध देखे हैं, लेकिन इतनी भयंकर शेलिंग कभी नहीं देखी। हम सिर्फ बिना डर के जीना चाहते हैं। लोग अपनी दुकानें खोल रहे हैं, लेकिन दिलों में डर अभी भी है। मजदूर चले गए हैं, काम बंद है और बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। केवल शांति ही जीवन को सामान्य बना सकती है।” निर्माण कार्य भी ठप हैं। रोड और ब्रिज निर्माण में लगे रविद अहमद ने बताया, “शेलिंग शुरू होने पर मजदूर चले गए। बिहार समेत बाहरी मजदूर लौटे नहीं हैं, इसलिए काम रुका हुआ है।”

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