सुकमा में बंद पड़े 123 स्कूल फिर से खुले, नियद नेल्लानार योजना से शिक्षा को मिली नई रफ्तार

सुकमा। नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा का उजाला फिर से फैल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की पहल से सुकमा जिले में सलवा जुडूम आंदोलन के दौरान बंद हुए सैकड़ों स्कूल अब दोबारा शुरू हो चुके हैं और नियद नेल्लानार योजना के जरिए शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
पुनर्जीवित हुई शिक्षा व्यवस्था
जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2006 में माओवादी प्रभाव और सलवा जुडूम आंदोलन के कारण कुल 123 स्कूल बंद हो गए थे, जिनमें 101 प्राथमिक और 21 माध्यमिक शालाएं शामिल थीं। प्रशासन के लगातार प्रयासों से अब सभी स्कूलों को फिर से शुरू कर दिया गया है और वर्तमान में माओवादी प्रभाव के कारण बंद स्कूलों की संख्या शून्य हो गई है।
बुनियादी ढांचे को मिला बल
दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए आवासीय विद्यालय और छात्रावास सुविधाओं को मजबूत किया गया है।
- 16 पोटा केबिन (आवासीय विद्यालय) संचालित, 6,722 छात्र पढ़ रहे हैं
- 16 पोटा केबिन छात्रावासों में 1,389 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं
- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय टाइप-3 के 3 विद्यालयों में 600 छात्राएं
- टाइप-4 के 2 छात्रावासों में 200 छात्राएं लाभान्वित

नियद नेल्लानार योजना से नई शुरुआत
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में वर्ष 2024-25 में नियद नेल्लानार योजना के तहत 7 नए प्राथमिक स्कूल खोले गए हैं, जिनमें अब तक 210 बच्चों ने प्रवेश लिया है। प्रशासन ने भविष्य में 19 और नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव भी तैयार किया है।
बदलती तस्वीर
प्रशासन का कहना है कि इन प्रयासों से न केवल बच्चों का भविष्य संवर रहा है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास और विकास की नई किरण भी जगी है। अब जहां पहले बंदूक की गूंज सुनाई देती थी, वहीं आज स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और किताबों की सरसराहट सुनाई दे रही है।







