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NDA सरकार का सख्त फैसला, 10 सर्कुलर रोड बंगले से 20 साल बाद विदा हुआ लालू परिवार

मध्य प्रदेश और यूपी की हलचल के बीच बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल आया है। नई NDA सरकार के गठन के बाद राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दे दिया गया है। यह वही बंगला है जो पिछले 20 सालों से लालू प्रसाद यादव के परिवार और राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र रहा। इस फैसले के साथ ही लालू–नीतीश के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और व्यक्तिगत समीकरणों पर भी गंभीर असर दिखाई दे रहा है।

10 सर्कुलर रोड सिर्फ एक आवास नहीं, बल्कि बिहार की सियासत का ‘नर्व सेंटर’ बन चुका था। यहीं से लालू परिवार प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति की रणनीति बनाता रहा। इससे पहले भी नीतीश कुमार NDA और महागठबंधन के बीच कई बार पाला बदल चुके हैं, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के इस आवासीय आवंटन पर कभी कोई खतरा नहीं आया। इस बार पहली बार सरकार गठन के तुरंत बाद इतना सख्त निर्णय लिया गया है।

हालिया विधानसभा चुनावों में BJP का प्रभाव अब तक के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत होकर उभरा है, जिसकी छाप सीधे इस फैसले पर दिखती है। लेजिस्लेटिव काउंसिल में नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए राबड़ी देवी को सरकार ने एक अलग आवास का औपचारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। ऐसे में 10 सर्कुलर रोड छोड़ने के सिवाय अब लालू परिवार के पास कोई विकल्प नहीं बचा।

तेजस्वी बनाम सरकार: कोर्ट में पहले भी मिल चुका झटका
2015 में जब महागठबंधन सत्ता में आया था, तब तेजस्वी यादव डिप्टी CM बने और उन्हें 5 देशरत्न मार्ग का बंगला मिला था। इसे डिप्टी CM का स्थायी आवास बनाने का प्रयास किया गया और इसका भव्य नवीनीकरण भी चर्चा में रहा। लेकिन 2017 में जब नीतीश कुमार BJP के साथ लौटे और सुशील मोदी डिप्टी CM बने, तब तेजस्वी को यह बंगला खाली करने का आदेश दिया गया। तेजस्वी ने उस समय हाईकोर्ट का रुख किया, पर अदालत से राहत नहीं मिली। उल्टा कोर्ट ने राज्य सरकार को पूर्व मुख्यमंत्रियों और पूर्व डिप्टी CM से सरकारी बंगले, गाड़ी, सुरक्षा और स्टाफ जैसी सुविधाएं वापस लेने का निर्देश भी दिया।

लालू परिवार का आक्रोश: ‘भैयारी रिश्ते का अंत’
बंगला खाली करने के नोटिस के बाद लालू परिवार ने एकजुट होकर इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेजप्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि छोटे भाई ने मुख्यमंत्री बनते ही बड़े भाई के आवास को खाली कराने का आदेश दे दिया। उन्होंने यह भी कहा कि 28 वर्षों से इस बंगले से राजद कार्यकर्ताओं की भावनाएं जुड़ी थीं, जिसे एक सरकारी नोटिस में खत्म कर दिया गया। इस घर के जाने के साथ ही लालू–नीतीश के बीच ‘भैयारी वाले नैतिक रिश्ते’ का भी अंत हो गया है।

रोहिणी आचार्या ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। राजद नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि बदलते चुनावी गणित और BJP के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का नतीजा है।

सरकार का पक्ष: सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा
NDA सरकार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि यह फैसला सरकारी आवासीय आवंटन नियमों के अंतर्गत लिया गया है। लेकिन सियासी विश्लेषकों का मानना है कि नोटिस का समय और उसके पीछे की सख्ती साफ तौर पर बदलते राजनीतिक संतुलन का संकेत देती है।

बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में NDA और राजद के संघर्ष को और तीखा बना सकता है। 10 सर्कुलर रोड से विदाई सिर्फ बंगला बदलने की नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में नए अध्याय की शुरुआत बन चुकी है।

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