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रायपुर में राष्ट्रीय कार्यशाला: शिक्षा में समानता और सशक्तिकरण की कुंजी है

रायपुर। नीति आयोग ने राजधानी रायपुर में “Fostering Mentorship in Education: A Pathway to Equity” विषय पर राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने में मेंटॉरशिप की भूमिका पर चर्चा कर राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना है।

कार्यशाला में देशभर से आए विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों ने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मेंटॉरशिप से शिक्षा में समानता आएगी, ड्रॉपआउट दर कम होगी और युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।

विशेष अतिथि वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा, “मेंटॉरशिप युवाओं को सशक्त करने की कुंजी है। शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं, बल्कि सही दिशा दिखाने का माध्यम है।” उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की औसत आयु 24 वर्ष है, जो राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। अगर युवाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

चौधरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ग्रामीण सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने के बावजूद उन्हें जीवन की दिशा समझने में काफी समय लगा। उन्होंने कहा कि कैरियर गाइडेंस और मेंटरशिप इस कमी को दूर कर सकती है। साथ ही उन्होंने स्थानीय भाषा और संस्कृति आधारित शिक्षा को जरूरी बताया।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि “हर बच्चे को मेंटरशिप मिलना उसका अधिकार है।” उन्होंने बताया कि देश में प्राथमिक स्तर पर 93% बच्चे स्कूल में दाखिला लेते हैं, लेकिन सेकेंडरी स्तर तक पहुंचते-पहुंचते यह संख्या घटकर 56% रह जाती है और 12वीं तक केवल 23% छात्र ही पहुंच पाते हैं।

डॉ. पॉल ने कहा कि पिछले चार वर्षों में केंद्रीय विश्वविद्यालयों से 15,000 और आईआईटी-आईआईएम से 4,000 से अधिक छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी। यह केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्रीय क्षति है। मेंटरशिप से छात्रों को आत्मविश्वास, जीवन कौशल और मार्गदर्शन मिलता है, जो ड्रॉपआउट को रोक सकता है।

कार्यशाला में यह सहमति बनी कि हर बच्चे तक मेंटरशिप पहुँचाना जरूरी है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें।

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