Murder Or Suicide: पत्नी की फांसी या पति की साजिश?

Murder Or Suicide: तीन मासूमों के सिर से उठा मां का साया

बिलासपुर के तोरवा थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। (Murder Or Suicide) एनई कॉलोनी में रहने वाली पूर्णिमा राजपूत की संदिग्ध हालातों में हुई मौत ने इंसानियत को झकझोर दिया है। परिजन इसे आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या बता रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह घरेलू विवाद का अंजाम था, या किसी खौफनाक साजिश की पटकथा पहले से लिखी जा चुकी थी। तीन मासूमों के सिर से मां का साया उठ गया है और परिजन न्याय की पुकार लगा रहे हैं। आखिर इस मौत के पीछे क्या छिपा है, आइए जानते हैं पूरी कहानी।

तोरवा में रहस्यमयी मौत (Murder Or Suicide)

रविवार की रात तोरवा की एनई कॉलोनी में अचानक हड़कंप मच गया जब राजेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि उसकी पत्नी पूर्णिमा ने फांसी लगा ली है। उसे लाइफ केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, लेकिन सोमवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने प्रारंभिक रूप से मर्ग कायम किया और शव को जिला अस्पताल की मर्च्युरी भेज दिया, मगर वहां जो हुआ उसने पूरे मामले का रुख बदल दिया। मृतका के परिजनों ने शवगृह में जमकर हंगामा किया और पति राजेंद्र सिंह पर हत्या का आरोप लगा दिया। पिता शंभू राम राजपूत का कहना है कि यह कोई आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है।

अवैध संबंध, घरेलू कलह या खूनी खेल ?? (Murder Or Suicide)

उन्होंने बताया कि दामाद राजेंद्र के अवैध संबंध थे, और जब पूर्णिमा ने इसका विरोध किया तो उसने गुस्से में उसकी जान ले ली और इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। राजेंद्र सिंह राजपूत मूल रूप से बेमेतरा के घोरहा का निवासी है और फिलहाल रेलवे एनई कॉलोनी में परिवार के साथ रह रहा था। बताया जा रहा है कि वह एसपी ऑफिस में ड्राइवर था और पहले डीजल-पेट्रोल घोटाले में जेल भी जा चुका है। इतना ही नहीं, वह खुद को क्राइम ब्रांच का पुलिसकर्मी बताकर लोगों को धोखा देता था और इसी झूठ के सहारे उसने पूर्णिमा से विवाह किया था…

लासपुर में पूर्णिमा की मौत ने खड़े किए कई सवाल

मृतका के पिता और परिजनों का कहना है कि शादी के बाद से ही पूर्णिमा के साथ राजेंद्र का व्यवहार अमानवीय था। आए दिन घर में झगड़े होते थे, वह पत्नी को प्रताड़ित करता था। पूर्णिमा ने कई बार मायके में शिकायत की लेकिन तीन बच्चों की परवरिश के लिए हर बार घर लौट आती थी। और अब उसी घर से उसकी निर्जीव देह मिली है। यह दृश्य पूरे परिवार के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं। दो बेटियां और एक छोटा बेटा अब बेसहारा हो गए हैं। पिता और चाचा का कहना है कि अगर पुलिस ने पहले ही उसकी शिकायतों को गंभीरता से लिया होता तो शायद आज पूर्णिमा जिंदा होती। अब सवाल यह है कि क्या इस बार उसे इंसाफ मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में कहीं दबकर रह जाएगा…..

साक्ष्य और परिस्थिति की बारीकी से जांच की जा रही है। 

फिलहाल तोरवा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। (Murder Or Suicide) सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हर एक साक्ष्य और परिस्थिति की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि हत्या के सबूत मिले तो दोषी को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। परिजनों की बस एक ही मांग है — पूर्णिमा को इंसाफ मिले, ताकि उसकी मौत बेवजह न कहलाए। अब पूरा शहर इसी उम्मीद में है कि सच्चाई सामने आए और दोषी को उसकी सजा मिले। क्योंकि इंसाफ ही है जो उस मां की आत्मा को शांति देगा, और शायद उन तीन मासूमों की आंखों में फिर से उम्मीद की लौ जला सकेगा….

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