महाराष्ट्र में फिर छिड़ा मराठी बनाम हिंदी विवाद, मंत्री जाधव ने दी सुलह की बात

महाराष्ट्र में एक बार फिर मराठी और गैर-मराठी भाषा को लेकर विवाद गरमा गया है। खासकर हिंदी भाषा को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के विरोध के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है।
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने फैसला किया है कि राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक हिंदी को तीसरी भाषा के तौर पर पढ़ाया जाएगा। इस फैसले का मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने जोरदार विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा – “हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं! अगर महाराष्ट्र को हिंदी में रंगने की कोशिश हुई, तो संघर्ष तय है।”
इस पर अब केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव का बयान सामने आया है। वह सोलापुर के पंढरपुर में विट्ठल भगवान के दर्शन के लिए पहुंचे थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि – “मराठी भाषा महाराष्ट्र में बहुत जरूरी है, लेकिन देश के दूसरे हिस्सों में संवाद के लिए हिंदी की भी जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम है, ना कि बांटने का। जब कोई मराठी व्यक्ति दूसरे राज्य में जाता है तो संवाद के लिए हिंदी आना जरूरी हो जाता है।
इससे पहले मुंबई में कुछ घटनाएं सामने आई थीं, जहां मराठी न बोल पाने पर लोगों के साथ अभद्रता और मारपीट की गई। हाल ही में एक वॉचमैन को हिंदी बोलने के कारण पीटा गया था, और ये आरोप MNS कार्यकर्ताओं पर लगे थे।
अब देखना होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है, लेकिन मंत्री जाधव की बातों से साफ है कि संवाद और एकता के लिए सभी भाषाओं का सम्मान जरूरी है।





