‘महाराष्ट्र में सिर्फ मराठी अनिवार्य’, सीएम फडणवीस बोले- हमें अपनी मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए

दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को भाषा नीति को लेकर अपना रुख साफ करते हुए कहा कि राज्य में केवल मराठी भाषा को ही अनिवार्य रखा जाएगा, जबकि अन्य भारतीय भाषाएं वैकल्पिक होंगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मराठी केवल संवाद की भाषा नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की संस्कृति, पहचान और आत्मा है, जिसका सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मराठी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि मराठी को न केवल महाराष्ट्र में, बल्कि पूरे देश में लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है। फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिया जाना गर्व की बात है और अब इसे व्यापक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने का समय आ गया है।
फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार विदेशी भाषाओं के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी, फ्रेंच और जर्मन जैसी विदेशी भाषाओं का स्वागत है, क्योंकि ये वैश्विक स्तर पर उपयोगी हैं। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अपनी मातृभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान और प्रचार-प्रसार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की जड़ें उसकी भाषा से जुड़ी होती हैं।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में मराठी भाषा अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएगी। इसके अलावा अन्य भारतीय भाषाओं को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस विषय पर नीति तय करने के लिए डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति यह तय करेगी कि अन्य भाषाएं किस कक्षा से पढ़ाई जाएंगी और उनका स्वरूप क्या होगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भाषा को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए। उद्देश्य केवल इतना है कि आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा से जुड़ी रहें और अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस दिशा में संतुलित और समावेशी नीति अपनाएगी।





