धान खरीदी में बड़ी चूक, किसानों का धान अटका- सिस्टम सोता रहा

बिलासपुर। किसानों से जुड़ी एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। खरीफ सीजन 2025–26 की धान खरीदी अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन इसके बावजूद हजारों क्विंटल धान अब भी खरीदी से बाहर पड़ा हुआ है। सरकार और प्रशासन द्वारा “एक-एक दाना खरीदे जाने” के दावों के उलट, जमीनी हकीकत किसानों की परेशानी बयान कर रही है।

धान खरीदी की समय-सीमा खत्म होने में अब सिर्फ दो दिन शेष हैं, लेकिन कई किसान अब भी अपनी उपज बेचने के लिए भटक रहे हैं। किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की गलती ने उन्हें इस संकट में डाला है।

कुछ किसानों ने बताया कि कृषि विस्तार अधिकारी भौतिक सत्यापन के लिए उनके घर पहुंचे थे। खलिहान में करीब 100 क्विंटल (250 बोरा) धान मौजूद होने के बावजूद, रिकॉर्ड में सिर्फ 10 क्विंटल दर्ज कर दिया गया। इसी एक गलती के कारण किसान लंबे समय से धान बेचने से वंचित हैं।

जब इस मामले में संबंधित अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने भी रिकॉर्ड में हुई त्रुटि को स्वीकार किया और माना कि इसी वजह से किसानों को परेशानी हो रही है। किसानों का कहना है कि शुरुआत में एग्रीस्टेट पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन को लेकर भी भारी दिक्कतें आईं। किसी तरह वह समस्या सुलझी, तो अब खरीदी के वक्त फिर से लापरवाही सामने आ रही है।

किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल सुधार कर शेष किसानों का धान खरीदा जाए और जरूरत पड़े तो धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाई जाए, ताकि किसी भी किसान को आर्थिक नुकसान न हो।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है-

क्या अंतिम दिनों में बचे किसानों की धान खरीदी हो पाएगी,

या फिर इस बार भी सरकारी दावे कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?

इसका जवाब अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिका है।

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