रिजल्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव, अब सालभर की पढ़ाई से बनेगा फाइनल परिणाम

राज्य में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। पहली से नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा तक का रिजल्ट सिस्टम बदल दिया गया है। अब सिर्फ साल के अंत में होने वाली वार्षिक परीक्षा से ही रिजल्ट तय नहीं होगा, बल्कि तिमाही और छमाही परीक्षाओं के अंक भी सीधे फाइनल रिजल्ट में जोड़े जाएंगे। यह नई व्यवस्था चालू शिक्षा सत्र से ही लागू कर दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत अगर कोई छात्र तिमाही या छमाही परीक्षा में कम अंक लाता है, तो उसका असर सीधे उसके वार्षिक परिणाम पर पड़ेगा। यानी अब पूरे साल की पढ़ाई मायने रखेगी, न कि केवल आखिरी परीक्षा। हालांकि यह बदलाव बोर्ड परीक्षाओं यानी कक्षा 10वीं और 12वीं पर लागू नहीं होगा। इस फैसले से राज्य के करीब 45 लाख छात्र प्रभावित होंगे।
शिक्षा विभाग का कहना है कि अब तक कई स्कूलों में तिमाही और छमाही परीक्षाएं सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई थीं। लेकिन अब जब इनके अंक फाइनल रिजल्ट में जुड़ेंगे, तो छात्रों और शिक्षकों दोनों की गंभीरता बढ़ेगी और पढ़ाई का स्तर भी बेहतर होगा।
नए नियमों के अनुसार, कक्षा पहली से चौथी तक तिमाही और छमाही परीक्षा के 20-20 प्रतिशत अंक और वार्षिक परीक्षा के 60 प्रतिशत अंक जोड़कर रिजल्ट तैयार किया जाएगा। वहीं कक्षा पांचवीं से आठवीं तक छमाही परीक्षा के 30 प्रतिशत और वार्षिक परीक्षा के 70 प्रतिशत अंक शामिल होंगे। कक्षा 9वीं और 11वीं के लिए यह प्रस्ताव माध्यमिक शिक्षा मंडल को भेजा गया है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि यह फैसला छात्रों को पूरे साल नियमित पढ़ाई के लिए प्रेरित करेगा और शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और मजबूत बनाने में मदद करेगा।





