Land Registry: बिलासपुर में जमीन की रजिस्ट्री पर ब्रेक,छोटे प्लॉट खरीदने वालों की बढ़ी मुश्किलें

Land Registry: पांच डिसमिल से कम जमीन की रजिस्ट्री पर रोक, सरकार के राजस्व को तगड़ा झटका

बिलासपुर में इन दिनों जमीन की रजिस्ट्री पर ब्रेक लग गया हैपांच डिसमिल यानी करीब 2200 वर्गफीट से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर लगी रोक का असर अब पूरे जिले में साफ दिखाई दे रहा है। (Land Registry) जहां पहले रोजाना 60 से 70 रजिस्ट्री होती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 20 से 25 रह गया है।

रजिस्ट्री दफ्तरों में सन्नाटा ,Land Registry

इस नए नियम ने न सिर्फ आम नागरिकों की परेशानी बढ़ा दी है, बल्कि सरकार के राजस्व पर भी तगड़ा झटका लगा है।रजिस्ट्री दफ्तरों में सन्नाटा है, दलालों की भीड़ गायब, और खरीदारों के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही है।प्रशासन का कहना है कि यह नियम अवैध प्लॉटिंग और कृषि भूमि के गलत डायवर्जन को रोकने के लिए लाया गया है।लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है।

बिलासपुर में ठप पड़ा रियल एस्टेट बाजार,(Land Registry)

बिलासपुर के आसपास के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में, जहां लोग छोटा प्लॉट लेकर घर बनाने का सपना देखते थे,वह सपना अब कागजों में अटक गया है।नियम के कारण सरकार को हर दिन लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है,वहीं छोटे भू-स्वामी और किसान बेचने की स्थिति में नहीं हैं,और खरीदारों के लिए जमीन खरीदना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है।इतना ही नहीं, भू-माफियाओं के लिए यह नियम अब सोने की खान बन गया है।

नियम ने बढ़ाई जनता की परेशानी,घट गई सरकारी आमदनी,जमीन रजिस्ट्री में गिरावट जारी

वे पांच डिसमिल से ज्यादा के बड़े भूखंडों को टुकड़ों में बांटकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इससे आम खरीदारों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया हैजबकि असली फायदा उठाने वाले कुछ प्रभावशाली लोग बन गए हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि नगरीय निकायों नगर निगम, नगर पालिका के दायरे में आने वाली जमीनों को इस नियम से बाहर रखा जाए,या फिर छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री के लिए कोई वैकल्पिक और सरल प्रक्रिया लागू की जाए।

राजस्व घटा,जनता अटकी,पांच डिसमिल रोक से बिलासपुर में रजिस्ट्री ठप

फिलहाल बिलासपुर में रियल एस्टेट पर सन्नाटा और लोगों में गुस्सा दोनों बढ़ रहे हैं। (Land Registry) सरकार की मंशा भले पारदर्शिता की हो, लेकिन असर ऐसा है कि न जमीन बिक रही है, न सपने बन रहे हैं।अब सबकी नज़र सरकार पर है क्या वो इस नियम में राहत देगी या फिर जनता की उम्मीदों पर ताला लगा रहेगा?

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