धान से आगे बढ़ा छत्तीसगढ़, कृषक उन्नति योजना 2.0 से दलहन-तिलहन को मिल रहा बड़ा बढ़ावा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब खेती केवल धान तक सीमित नहीं रह गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को लाभकारी बनाने के लिए लगातार नए कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में कृषक उन्नति योजना 2.0 और PM-AASHA जैसे निर्णयों ने कृषि नीति में बड़ा बदलाव लाया है।
कृषक उन्नति योजना 2.0 के तहत किसानों को फसल के अनुसार प्रति एकड़ ₹10,000 से ₹15,351 तक की इनपुट सहायता दी जा रही है। इसका फायदा धान के साथ-साथ अब दलहन, तिलहन, मक्का और अन्य फसलों पर भी मिलेगा। इससे किसानों का रुझान इन फसलों की ओर बढ़ रहा है, जो राज्य में फसल विविधीकरण को मजबूत कर रहा है।
सरकार की पहल पर खरीफ सीजन के लिए 425 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिल चुकी है। इससे दलहन-तिलहन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी को केंद्र से मंजूरी मिल गई है, जो किसानों के लिए दोहरी राहत है।
मार्च 2024 में शुरू हुई इस योजना के पहले चरण में लगभग 24.72 लाख किसानों को ₹13,320 करोड़ रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से दी गई। DBT से भुगतान होने पर बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और किसानों को पूरा लाभ मिला। इससे गांवों में लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि यह योजना केवल सहायता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के कृषि विकास मॉडल की नींव है। उनका मानना है, “किसान मजबूत होगा तो राज्य मजबूत होगा।”
कुल मिलाकर, कृषक उन्नति योजना 2.0 छत्तीसगढ़ के किसानों को धान-केंद्रित खेती से निकालकर दलहन-तिलहन और वैकल्पिक फसलों की ओर ले जा रही है, जिससे राज्य टिकाऊ, संतुलित और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में आगे बढ़ रहा है।





