अव्यवस्थाओं से जूझ रहा कानन पेंडारी, घट रही पर्यटकों की संख्या

बिलासपुर: शहर के पास स्थित कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन, जो कभी लोगों के बीच खासा लोकप्रिय था, अब बदहाली का शिकार होता नजर आ रहा है। अव्यवस्थाओं, देखरेख की कमी और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या धीरे-धीरे घटती जा रही है।
कानन पेंडारी को वन्य जीवों के संरक्षण और लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसकी हालत काफी खराब हो चुकी है। जगह-जगह टूटी दीवारें, लीकेज पाइप, गंदगी और टूटे हुए जानवरों की जानकारी वाले बोर्ड यहां की लापरवाही की तस्वीर साफ दिखाते हैं।
अधिकारियों की लापरवाही
यहां पदस्थ अधीक्षक बी.एस. राजपूत अक्सर तय समय पर ऑफिस नहीं पहुंचते। बताया जा रहा है कि कई बार दोपहर 1 बजे तक भी उनका कार्यालय बंद रहता है। अधीक्षक की गैरमौजूदगी का फायदा यहां के कर्मचारी भी उठा रहे हैं और अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं।
महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी
महिला पर्यटकों के लिए प्रसाधन (टॉयलेट) की स्थिति बेहद खराब है। गंदगी और बदबू की वजह से महिलाएं वापिस लौट जाती हैं। पानी की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है। जहां पहले पानी की सुविधा थी, वहां अब कर्मचारी अपनी सफाई सामग्री रख रहे हैं। कई जगह नल और पाइप गायब हैं, जिससे गर्मी में आने वाले लोग, खासकर बच्चे, काफी परेशान हो रहे हैं।
जानवर भी नदारद, केज खाली
कई पिंजरे खाली पड़े हैं, जिनमें जानवर ही नहीं हैं। पर्यटकों को जानवरों की जानकारी देने वाले बोर्ड भी टूटे हुए हैं या गायब हैं। सौंदर्यीकरण और मरम्मत के लिए समय-समय पर फंड मिलने के बावजूद कोई सुधार नहीं किया गया।
कानन पेंडारी 281 एकड़ में फैला है और यहां आने वाले ज्यादातर लोग पैदल ही घूमते हैं। ऐसे में सुविधाओं की कमी उनका अनुभव और भी खराब बना रही है। यदि जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में कानन पेंडारी पूरी तरह से उपेक्षित होकर पर्यटकों से खाली हो सकता है।
लोगों की अपील है कि सरकार और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर जल्द ध्यान दें, ताकि शहर का एकमात्र चिड़ियाघर फिर से पहले जैसी रौनक पा सके।





