जस्टिस वर्मा केस: सुप्रीम कोर्ट पैनल ने बताया, आग लगने के बाद हटाई गई थी नकदी
स्टोररूम में मिली जली नकदी, जांच में खुलासा

दिल्ली। 14 मार्च 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगी थी। आग स्टोर रूम में लगी, जहां से दमकल कर्मियों को जले हुए 500-500 रुपए के नोटों से भरी बोरियां मिलीं। सुप्रीम कोर्ट के तीन सदस्यीय जांच पैनल ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि स्टोर रूम जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के कब्जे में था। आग लगने के बाद वहां से नकदी को हटाने के प्रयास भी किए गए।
पैनल ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, गवाहों और जांच के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला। दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा और फायर सर्विस प्रमुख समेत 50 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए गए। रिपोर्ट 4 मई को तत्कालीन CJI संजीव खन्ना को सौंपी गई, जिसमें जस्टिस वर्मा को दोषी बताया गया। इसके आधार पर ‘इन-हाउस प्रोसीजर’ के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
केंद्र सरकार ला सकती है महाभियोग प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार मानसून सत्र में संसद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है। हालांकि सरकार चाहती है कि वे खुद इस्तीफा दे दें। वर्मा इस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट में हैं, लेकिन उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं दिया गया है।
पहले भी घोटाले में आया था नाम
2018 में सिंभावली शुगर मिल घोटाले में जस्टिस वर्मा का नाम सामने आया था। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शिकायत पर CBI ने एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि मिल ने किसानों के नाम पर लिए गए 97.85 करोड़ रुपए के लोन का गलत इस्तेमाल किया। जस्टिस वर्मा उस समय मिल के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह जांच बाद में बंद कर दी गई थी।





