संघर्ष से सफलता तक का सफर: भावुक हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, गरीबी के दिनों को किया याद

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन के दिनों को याद करते हुए भावुक हो गए। मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि कभी ऐसा समय भी था, जब उनके पास ठंड में पहनने के लिए जूते तक नहीं होते थे।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए संघर्ष जरूरी होता है। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि कई बार चप्पल होती थी, लेकिन जूते नहीं मिल पाते थे और सर्दियों में यह स्थिति और कठिन हो जाती थी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी वह किसी गरीब व्यक्ति को परेशान देखते हैं, तो उन्हें अपना अतीत याद आ जाता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद गरीबी और अभाव का दर्द झेला है, इसलिए दूसरों की तकलीफ को आसानी से समझ पाते हैं।

डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि उनके पिता के न रहने के कारण उन्होंने बाबा साहेब को अपना आदर्श और मार्गदर्शक माना। उनके विचारों से उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के विचारों में उन्हें अपनी आवाज सुनाई देती है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज जिस पद पर वह हैं, उसके लिए वह खुद को पूरी तरह योग्य नहीं मानते। उन्होंने विनम्रता के साथ कहा कि जनता के आशीर्वाद और संघर्ष के बल पर ही वह इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

अपने निजी अनुभव साझा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में खुद रोटियां बनाईं और सीमित साधनों में जीवन बिताया। इन अनुभवों ने उन्हें संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बनाया।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों के प्रति उनकी संवेदना उनके जीवन के संघर्षों से ही जन्मी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय उन्हें सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

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