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एक फैसले से ITC के शेयर लुढ़के, LIC को 11 हजार करोड़ से ज्यादा का झटका

नए साल की शुरुआत शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरी रही। सरकार द्वारा सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के फैसले का असर एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी ITC के शेयरों पर साफ दिखा। महज दो कारोबारी दिनों में ITC का शेयर करीब 14 प्रतिशत टूट गया और 52 हफ्तों के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर सरकारी बीमा कंपनी LIC पर पड़ा, जिसकी निवेश वैल्यू में भारी कमी दर्ज की गई।

दो दिनों की तेज गिरावट के दौरान ITC का शेयर फिसलकर 345 रुपये के आसपास पहुंच गया। बाजार जानकारों के मुताबिक टैक्स बढ़ने से सिगरेट कारोबार की मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है, इसी वजह से निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की। चूंकि ITC में प्रमोटर की हिस्सेदारी नहीं है और पूरी हिस्सेदारी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास है, इसलिए इसका सीधा असर संस्थागत निवेशकों पर पड़ा।

ITC में LIC की हिस्सेदारी करीब 15.86 प्रतिशत है। शेयरों में आई गिरावट से पहले ITC में LIC के निवेश की वैल्यू करीब 80 हजार करोड़ रुपये के आसपास थी, जो गिरावट के बाद घटकर लगभग 68 हजार करोड़ रुपये रह गई। इस तरह सिर्फ दो दिनों में LIC को करीब 11,500 करोड़ रुपये के बराबर का नुकसान हुआ है।

सिर्फ LIC ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी बीमा कंपनियों को भी नुकसान झेलना पड़ा। जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन और न्यू इंडिया एश्योरेंस जैसी कंपनियों की ITC में हिस्सेदारी की वैल्यू में भी बड़ी गिरावट आई। तीनों सरकारी बीमा कंपनियों को मिलाकर कुल नुकसान करीब 13,700 करोड़ रुपये के आसपास आंका जा रहा है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह नुकसान फिलहाल कागजी यानी नोशनल लॉस है। वास्तविक नुकसान तभी माना जाएगा जब ये कंपनियां मौजूदा स्तर पर अपने शेयर बेचती हैं। बीमा कंपनियां आमतौर पर लंबी अवधि के निवेश के नजरिए से शेयर रखती हैं, इसलिए बाजार के ऐसे उतार-चढ़ाव का असर तुरंत उनकी बैलेंस शीट पर नहीं पड़ता।

इस गिरावट से ITC के मार्केट कैप में भी बड़ी कमी आई है और कंपनी की बाजार वैल्यू में करीब 72 हजार करोड़ रुपये घटे हैं। कारोबार के अंत में हालांकि शेयर में थोड़ी रिकवरी दिखी, लेकिन निवेशकों के लिए यह साफ संकेत है कि सरकारी नीतिगत फैसलों का असर शेयर बाजार पर कितनी तेजी से पड़ सकता है।

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